योगिनी एकादशी व्रत कथा | Yogini Ekadashi Vrat Katha PDF in Hindi

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योगिनी एकादशी व्रत कथा | Yogini Ekadashi Vrat Katha in Hindi

दोस्तों आज हम आपके लिए लेकर आये हैं (Yogini Ekadashi Vrat Katha Hindi PDF) योगिनी एकादशी व्रत कथा पीडीएफ हिंदी भाषा में जिसमे आपको आरती, पूजा विधि, मंत्र, शुभ मुहूर्त व बहुत कुछ पढ़ने को मिलेगा। योगिनी एकादशी व्रत कथा को सम्पूर्ण पढ़ा जाता है जब आप व्रत के बाद पूजा करते हैं। आषाढ़ मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन योगिनी एकादशी व्रत का विधान है। ऐसा माना जाता है कि योगिनी एकादशी व्रत की कथा श्रवण का फल 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान माना गया है। इस पोस्ट में आप बड़ी आसानी से (Yogini Ekadashi Vrat Katha Hindi PDF) योगिनी एकादशी व्रत कथा पीडीएफ हिंदी भाषा में डाउनलोड कर सकते हैं सिर्फ एक क्लिक में।

योगिनी एकादशी व्रत कथा हिंदी पीडीएफ | Yogini Ekadashi Vrat Katha Hindi PDF

धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि भगवन, मैंने ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के व्रत का माहात्म्य सुना। अब कृपया आषाढ़ कृष्ण एकादशी की कथा सुनाइए। इसका नाम क्या है? माहात्म्य क्या है? यह भी बताइए।

श्रीकृष्ण कहने लगे कि हे राजन! आषाढ़ कृष्ण एकादशी का नाम योगिनी है। इसके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यह इस लोक में भोग और परलोक में मुक्ति देने वाली है। यह तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। मैं तुमसे पुराणों में वर्णन की हुई कथा कहता हूँ। ध्यानपूर्वक सुनो।
स्वर्गधाम की अलकापुरी नामक नगरी में कुबेर नाम का एक राजा रहता था। वह शिव भक्त था और प्रतिदिन शिव की पूजा किया करता था। हेम नाम का एक माली पूजन के लिए उसके यहाँ फूल लाया करता था। हेम की विशालाक्षी नाम की सुंदर स्त्री थी। एक दिन वह मानसरोवर से पुष्प तो ले आया लेकिन कामासक्त होने के कारण वह अपनी स्त्री से हास्य-विनोद तथा रमण करने लगा।
इधर राजा उसकी दोपहर तक राह देखता रहा। अंत में राजा कुबेर ने सेवकों को आज्ञा दी कि तुम लोग जाकर माली के न आने का कारण पता करो, क्योंकि वह अभी तक पुष्प लेकर नहीं आया। सेवकों ने कहा कि महाराज वह पापी अतिकामी है, अपनी स्त्री के साथ हास्य-विनोद और रमण कर रहा होगा। यह सुनकर कुबेर ने क्रोधित होकर उसे बुलाया।

हेम माली राजा के भय से काँपता हुआ ‍उपस्थित हुआ। राजा कुबेर ने क्रोध में आकर कहा- ‘अरे पापी! नीच! कामी! तूने मेरे परम पूजनीय ईश्वरों के ईश्वर श्री शिवजी महाराज का अनादर किया है, इस‍लिए मैं तुझे शाप देता हूँ कि तू स्त्री का वियोग सहेगा और मृत्युलोक में जाकर कोढ़ी होगा।’
कुबेर के शाप से हेम माली का स्वर्ग से पतन हो गया और वह उसी क्षण पृथ्वी पर गिर गया। भूतल पर आते ही उसके शरीर में श्वेत कोढ़ हो गया। उसकी स्त्री भी उसी समय अंतर्ध्यान हो गई। मृत्युलोक में आकर माली ने महान दु:ख भोगे, भयानक जंगल में जाकर बिना अन्न और जल के भटकता रहा।

रात्रि को निद्रा भी नहीं आती थी, परंतु शिवजी की पूजा के प्रभाव से उसको पिछले जन्म की स्मृति का ज्ञान अवश्य रहा। घूमते-घ़ूमते एक दिन वह मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में पहुँच गया, जो ब्रह्मा से भी अधिक वृद्ध थे और जिनका आश्रम ब्रह्मा की सभा के समान लगता था। हेम माली वहाँ जाकर उनके पैरों में पड़ गया।
उसे देखकर मारर्कंडेय ऋषि बोले तुमने ऐसा कौन-सा पाप किया है, जिसके प्रभाव से यह हालत हो गई। हेम माली ने सारा वृत्तांत कह ‍सुनाया। यह सुनकर ऋषि बोले- निश्चित ही तूने मेरे सम्मुख सत्य वचन कहे हैं, इसलिए तेरे उद्धार के लिए मैं एक व्रत बताता हूँ। यदि तू आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी नामक एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करेगा तो तेरे सब पाप नष्ट हो जाएँगे।
यह सुनकर हेम माली ने अत्यंत प्रसन्न होकर मुनि को साष्टांग प्रणाम किया। मुनि ने उसे स्नेह के साथ उठाया। हेम माली ने मुनि के कथनानुसार विधिपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से अपने पुराने स्वरूप में आकर वह अपनी स्त्री के साथ सुखपूर्वक रहने लगा।

भगवान कृष्ण ने कहा- हे राजन! यह योगिनी एकादशी का व्रत 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फल देता है। इसके व्रत से समस्त पाप दूर हो जाते हैं और अंत में स्वर्ग प्राप्त होता है।

योगिनी एकादशी व्रत और पूजा की विधि | Yogini Ekadashi Vrat Pooja Vidhi

  1. एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर नहाएं।
  2. फिर दिनभर व्रत और श्रद्धा अनुसार दान का संकल्प लें।
  3. इसके बाद विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें।
  4. भगवान विष्णु को पंचामृत से नहलाएं।
  5. भगवान को स्नान करवाने के बाद उस चरणामृत को व्रत करने वाला पिए और परिवार के सभी सदस्यों को भी प्रसाद के रूप में दें। माना जाता है कि इससे शारीरिक परेशानियां दूर हो जाती हैं।
  6. फिर भगवान को गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि पूजन सामग्री चढ़ाएं और कथा सुनें।

चावल और तामसिक चीजें खाने से बचें

  1. एकादशी तिथि पर चावल और तामसिक चीजें खाने से बचें। धर्म ग्रंथों में लहसुन,प्याज और मांसाहार को तामसिक कहा गया है।
  2. किसी भी तरह का नशा न करें। पूरे दिन नियम और संयम से रहें।
  3. इस दिन शारीरिक और मानसिक तौर से हिंसा न हो इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
  4. किसी की बुराई न करें। हो सके तो रात में जागरण करते हुए भजन और कीर्तन करें।
  5. धर्म ग्रंथों के अनुसार एकादशी को जुआ खेलना, सोना, पान खाना, दूसरों की बुराई, चुगली, चोरी, हिंसा, संभोग, गुस्सा और झूठ बोलना। इन सब बातों से बचें।

योगिनी एकादशी व्रत इस मंत्र का करें जप

मम सकल पापक्षयपूर्वक कुष्ठादिरोग।

निवृत्तिकामनया योगिन्येकादशीव्रतमहं करिष्ये।।

योगिनी एकादशी डेट

योगिनी एकादशी 5 जुलाई 2021 दिन सोमवार

योगिनी एकादशी मुहूर्त

  • एकादशी तिथि प्रारम्भ – 04 जुलाई 2021 की सुबह 07 बजकर 55 मिनट पर
  • एकादशी तिथि समाप्त – 5 जुलाई 2021 की सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर
  • पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 6 जुलाई की सुबह 05 बजकर 29 मिनट से 08 बजकर 16 मिनट पर

एकादशी पूजा सामग्री लिस्ट

श्री विष्णु जी का चित्र अथवा मूर्ति, पुष्प, नारियल, सुपारी, फल, लौंग, धूप, दीप, घी, पंचामृत, अक्षत, तुलसी दल, चंदन, मिष्ठान

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