विश्वकर्मा पुराण | Vishwakarma Puran PDF in Hindi

विश्वकर्मा पुराण | Vishwakarma Puran Hindi PDF Download

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विश्वकर्मा पुराण | Vishwakarma Puran Hindi PDF Summary

नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको विश्वकर्मा पुराण PDF / Vishwakarma Puran PDF in Hindi के लिए डाउनलोड लिंक दे रहे हैं। विश्वकर्मा पुराण मुख्य रूप से भगवान विश्वकर्मा को समर्पित है। विश्वकर्मा पुराण भगवान विश्वकर्मा की शक्ति और सुंदरता के बारे में बताती है। विश्वकर्मा पुराण बहुत ही धार्मिक और हिंदू भजनों में से एक है इसलिए सभी भगवान विश्वकर्मा भक्त इस विश्वकर्मा पुराण को बहुत ध्यान से पढ़ते हैं। पुरानी हिन्दू मान्यता के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहला वास्तुकार कहा जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस समस्त ब्रह्मांड की रचना भी विश्वकर्मा जी के हाथों से हुई है। ऋग्वेद के 10वे अध्याय के 121वे सूक्त में लिखा है कि विश्वकर्मा जी के द्वारा ही धरती, आकाश और जल की रचना की गई है। विश्वकर्मा पुराण के अनुसार आदि नारायण ने सर्वप्रथम ब्रह्मा जी और फिर विश्वकर्मा जी की रचना की।

विश्वकर्मा पुराण PDF | Vishwakarma Puran PDF in Hindi

प्राचीन काल में जितनी भी राजधानियां थी। उन सभी का निर्माण विश्वकर्मा जी के द्वारा ही किया गया था।यहां तक की सतयुग का स्वर्ग लोक, त्रेतायुग की लंका, द्वापर की द्वारिका और कलियुग का हस्तिनापुर सभी विश्वकर्मा जी के द्वारा ही रचित थे।सुदामापुरी की रचना के बारे में भी यह कहा जाता है कि उसके निर्माता भी विश्वकर्मा जी ही थे। इससे यह पता चलता है कि धन धान्य की अभिलाषा करने वालों को भगवान विश्वकर्मा की पूजा अवश्य करनी चाहिए।

विश्वकर्मा जी को देवताओं के शिल्पी के रूप में विशिष्ट स्थान प्राप्त है। भगवान विश्वकर्मा की एक पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में काशी में रहने वाला एक रथकार अपनी पत्नी के साथ रहता था।वह अपने कार्य में निपुण तो था लेकिन स्थान- स्थान पर घूमने पर भी वह भोजन से अधिक धन प्राप्त नहीं कर पाता था। उसके जीविकापर्जन का साधन निश्चित नहीं था। इतना ही नहीं उस रथकार की पत्नी भी पुत्र न होने के कारण चिंतित रहा करती थी।

पुत्र प्राप्ति के लिए दोनों साधु और संतों के पास जाते थे। लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी न हो सकी। तब एक पड़ोसी ब्राह्मण ने रथकार से कहा तुम दोनों भगवान विश्वकर्मा की शरण में जाओ। तुम्हारी सभी इच्छाएं अवश्य ही पूरी होंगी और अमावस्या तिथि को व्रत कर भगवान विश्वकर्मा का महत्व सुनों। इसके बाद अमावस्या को रथकार की पत्नी ने भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जिससे उसे धन धान्य और पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई और वह सुखी जीवन व्यतीत करने लगे।

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