वार्षिक श्राद्ध विधि | Varshik Shradh Vidhi PDF in Hindi

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वार्षिक श्राद्ध विधि | Varshik Shradh Vidhi Hindi PDF Summary

प्रिय पाठकों, प्रस्तुत लेख में हम आपके लिए वार्षिक श्राद्ध विधि pdf के सन्दर्भ में जानकारी देने जा रहे हैं। श्राद्धों का पितरों के साथ अटूट संबंध है। पितरों के बिना श्राद्ध की कल्पना नहीं की जा सकती। श्राद्ध पितरों को आहार पहुँचाने का माध्यम मात्र है। मृत व्यक्ति के लिए जो श्रद्धायुक्त होकर तर्पण, पिण्ड, दानादि किया जाता है, उसे श्राद्ध कहा जाता है और जिस मृत व्यक्ति के एक वर्ष तक के सभी और्ध्व दैहिक क्रिया कर्म संपन्न हो जायें, उसी की पितर संज्ञा हो जाती है।

“मेरे वे पितर जो प्रेतरूप हैं, तिलयुक्त जौं के पिण्डों से तृप्त हों। साथ ही सृष्टि में हर वस्तु ब्रह्मा से लेकर तिनके तक, चर हो या अचर, मेरे द्वारा दिये जल से तृप्त हों।” – वायु पुराण

 

हिंदी भाषा में वार्षिक श्राद्ध की सम्पूर्ण वैदिक विधि

श्राद्ध दिवस से पूर्व दिवस को बुद्धिमान पुरुष श्रोत्रिय आदि से विहित ब्राह्मणों को पितृ-श्राद्ध तथा वैश्व-देव-श्राद्ध के लिए निमंत्रित करें। पितृ-श्राद्ध के लिए सामर्थ्यानुसार अयुग्म तथा वैश्व-देव-श्राद्ध के लिए युग्म ब्राह्मणों को निमंत्रित करना चाहिए। निमंत्रित तथा निमंत्रक क्रोध, स्त्रीगमन तथा परिश्रम आदि से दूर रहे।

श्राद्ध-दिवस पर निम्न प्रक्रिया का पालन निमंत्रित तथा निमंत्रक को करना विहित। है वार्षिक श्राद्ध की विस्तृत विधि पीडीऍफ़ फाइल में दी गयी है जिसे आप नीचे दिए हुए डाउनलोड बटन पर क्लिक करके प्राप्त कर सकते हैं, तथा उसके माध्यम से आप घर पर पूर्ण विधि – विधान से पितरों का श्राद्ध तर्पण आदि कर सकते हैं।

 

वार्षिक श्राद्ध निमंत्रण पत्र

Varshik Shradh Nimantran Patra
Varshik Shradh Nimantran Patra

 

श्राद्ध क्या है ?

श्राद्ध प्रथा वैदिक काल के बाद शुरू हुई और इसके मूल में इसी श्लोक की भावना है। उचित समय पर शास्त्रसम्मत विधि द्वारा पितरों के लिए श्रद्धा भाव से मन्त्रों के साथ जो दान-दक्षिणा आदि, दिया जाय, वही श्राद्ध कहलाता है।

20 अंश रेतस (सोम) को पितृॠण कहते हैं। 28 अंश रेतस के रूप में श्रद्धा नामक मार्ग से भेजे जाने वाले पिण्ड तथा जल आदि के दान को श्राद्ध कहते हैं। इस श्रद्धावान मार्ग का संबंध मध्याह्न काल में श्राद्ध करने का विधान है।

 

श्राद्ध के देवता कौन होते हैं ?

वैदिक वर्णन के अनुसार वसु, रुद्र तथा आदित्य को श्राद्ध का देवता माना जाता है।

 

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