बैकुंठ चतुर्दशी व्रत कथा | Vaikunth Chaturdashi Vrat Katha PDF in Hindi

बैकुंठ चतुर्दशी व्रत कथा | Vaikunth Chaturdashi Vrat Katha Hindi PDF Download

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बैकुंठ चतुर्दशी व्रत कथा | Vaikunth Chaturdashi Vrat Katha Hindi PDF Summary

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप बैकुंठ चतुर्दशी व्रत कथा / Vaikunth Chaturdashi Vrat Katha PDF प्राप्त कर सकते हैं। हिन्दू वैदिक मान्यताओं के अनुसार वैकुण्ठ चतुर्दशी को बहुत अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। समस्त प्रकार की चतुर्दशी तिथियों में वैकुण्ठ चतुर्दशी को सर्वोत्तम माना जाता है।

यदि आपके घर में दुःख – दारिद्य का वास रहता है तथा हमेशा किसी न किसी प्रकार कलेश बना रहता है तो आपको वैकुण्ठ चतुर्दशी का व्रत अवश्य करना चाहिए क्योंकि इस व्रत को करने से व्यक्ति के ऊपर भगवान् विष्णु जी की छत्रछाया रहती है और वह समस्त प्रकार के संकटों से सुरक्षित रहता है।

वैकुण्ठ चतुर्दशी की व्रत कथा | Vaikuntha Chaturdashi Katha PDF in Hindi

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार भगवान विष्णु ने काशी में भगवान शिव को एक हजार स्वर्ण कमल के पुष्प यानी फूल चढ़ाने का संकल्प किया। भगवान शिव ने विष्णु जी की परीक्षा लेने के लिए सभी में से एक स्वर्ण पुष्प कम कर दिया। पुष्प कम होने पर विष्णु जी अपनी ‘कमल नयन’ आंख को समर्पित करने लगे। तभी भगवान शिव उनकी यह भक्ति देखकर बहुत प्रसन्न हुए तथा प्रकट होकर कहा कि कार्तिक मास की इस शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी ‘वैकुण्ठ चौदस’ के नाम से जानी जाएगी। मान्यता है इस दिन व्रत पूर्वक जो पहले आपका पूजन करेगा, उसे वैकुण्ठ लोक की प्राप्ति होगी।

बैकुंठ चतुर्दशी महत्व | Significance of Vaikunth Chaturdashi

बैकुंठ चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु की 1 हजार कमलों से पूजा करने वाले व्यक्ति और उसके परिवार को बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। इस दिन श्राद्ध और तर्पण का भी विशेष महत्व है। बैकुंठ चतुर्दशी का व्रत रखने से भी बैकुंठ धाम की अंत में प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन महाभारत के युद्ध के बाद, उसमें मारे गए लोगों का भगवान श्री कृष्ण ने श्राद्ध करवाया था।

बैकुंठ चतुर्दशी की पूजा विधि | Vaikunth Chaturdashi Puja Vidhi

  • इस दिन सुबह जल्दी उठ जाएं और स्नानदि से निवृत्त हो जाएं।
  • इसके बाद स्वच्छ कपड़े पहनें और विष्णु जी के समक्ष हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प करें।
  • इस पूरे दिन विष्णु और शिव जी के नाम का उच्चारण करें।
  • शाम के समय 108 पुष्पों के साथ भगवान विष्णु की पूजा करें।
  • इसके अगले दिन सुबह भगवान शिव का पूजन करें।
  • अपने सामर्थ्यनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं। साथ ही दान भी कर व्रत का पार करें।

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