तुलसी विवाह कथा | Tulsi Vivah Katha PDF in Hindi

तुलसी विवाह कथा | Tulsi Vivah Katha Hindi PDF Download

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तुलसी विवाह कथा | Tulsi Vivah Katha Hindi PDF Summary

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से तुलसी विवाह कथा PDF / Tulsi Vivah Katha PDF in Hindi प्राप्त कर सकते हैं। कार्तिक मास की एकादशी तिथि को तुलसी शालिग्राम विवाह का आयोजन किया जाता है। तुलसी शालिग्राम विवाह पूजन एक अत्यधिक प्रचलित पूजन है, जो कि भारत सहित सम्पूर्ण विश्वभर में निवास कर रहे हिन्दुओं द्वारा मनाया जाता है।

तुलसी माता और शालिग्राम जी का विवाह कराने के बाद ही एकादशी तिथि के उपरांत हिन्दुओं में विवाह आदि का आरम्भ हो जाता है। तुलसी को हिन्दू धर्म में बहुत ही अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। साथ ही शालिग्राम जी को भगवान् श्री हरी विष्णु का रूप माना जाता है। यदि आप भी तुलसी शलिग्राम पूजन करना चाहते हैं, तो इस तुलसी शालिग्राम विवाह कथा को अवश्य पढ़ें।

तुलसी विवाह कथा PDF | Tulsi Vivah Katha PDF in Hindi

तुलसी (पौध) की उत्पत्ति कैसे व क्यों हुई इसका एक दृष्टांत पौराणिक कथा में आता है। पौराणिक कथानुसार एक बार दैत्यराज जालंधर के साथ भगवान विष्णु को युद्ध करना पड़ा। काफी दिन तक चले संघर्ष में भगवान के सभी प्रयासों के बाद भी जालंधर परास्त नहीं हुआ।

अपनी इस विफलता पर श्री हरि ने विचार किया कि यह दैत्य आखिर मारा क्यों नहीं जा रहा है। तब पता चला की दैत्यराज की रूपवती पत्नी वृंदा का तप-बल ही उसकी मृत्यु में अवरोधक बना हुआ है। जब तक उसके तप-बल का क्षय नहीं होगा तब तक राक्षस को परास्त नहीं किया जा सकता।

इस कारण भगवान ने जालंधर का रूप धारण किया व तपस्विनी वृंदा की तपस्या के साथ ही उसके सतीत्व को भी भंग कर दिया। इस कार्य में प्रभु ने छल व कपट दोनों का प्रयोग किया। इसके बाद हुए युद्ध में उन्होंने जालंधर का वध कर युद्ध में विजय पाई।

पर जब वृंदा को भगवान के छलपूर्वक अपने तप व सतीत्व को समाप्त करने का पता चला तो वह अत्यंत क्रोधित हुई व श्रीहरि को श्राप दिया कि तुम पत्थर के हो जाओ। इस श्राप को प्रभु ने स्वीकार किया पर साथ ही उनके मन में वृंदा के प्रति अनुराग उत्पन्न हो गया।

तब उन्होंने उससे कहा कि वृंदा तुम वृक्ष बन कर मुझे छाया प्रदान करना। वही वृंदा तुलसी रूप में पृथ्वी पर उत्पन्न हुई व भगवान शालिग्राम बने। इस प्रकार कार्तिक शुक्ल एकादशी को तुलसी-शालिग्राम का प्रादुर्भाव हुआ। देवउठनी से छह महीने तक देवताओं का दिन प्रारंभ हो जाता है। अतः तुलसी का भगवान श्री हरि विष्णु शालीग्राम स्वरूप के साथ प्रतीकात्मक विवाह कर श्रद्धालु उन्हें वैकुंठ को विदा करते हैं।

तुलसी जी की आरती | Tulsi Ji Ki Aarti

जय जय तुलसी माता

सब जग की सुख दाता, वर दाता

जय जय तुलसी माता ।।

सब योगों के ऊपर, सब रोगों के ऊपर

रुज से रक्षा करके भव त्राता

जय जय तुलसी माता।।

बटु पुत्री हे श्यामा, सुर बल्ली हे ग्राम्या

विष्णु प्रिये जो तुमको सेवे, सो नर तर जाता

जय जय तुलसी माता ।।

हरि के शीश विराजत, त्रिभुवन से हो वन्दित

पतित जनो की तारिणी विख्याता

जय जय तुलसी माता ।।

लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन में

मानवलोक तुम्ही से सुख संपति पाता

जय जय तुलसी माता ।।

हरि को तुम अति प्यारी, श्यामवरण तुम्हारी

प्रेम अजब हैं उनका तुमसे कैसा नाता

जय जय तुलसी माता ।।

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तुलसी विवाह कथा | Tulsi Vivah Katha pdf

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