तिसुआ सोमवार कथा | Tisua Somvar Vrat Katha PDF in Hindi

तिसुआ सोमवार कथा | Tisua Somvar Vrat Katha Hindi PDF Download

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तिसुआ सोमवार कथा | Tisua Somvar Vrat Katha Hindi PDF Summary

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप तिसुआ सोमवार कथा / Tisua Somvar Vrat Katha PDF प्राप्त कर सकते हैं। तिसुआ सोमवार व्रत को हिन्दू धर्म में बहुत अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस व्रत के अंतर्गत जगन्नाथ (जगदीश) जी के मंदिर और प्रतीकों की पूजा होती है तथा विभिन्न पकवानों का भोग अर्पित किया जाता है।

चैत्र मास के सभी सोमवार को तिसुआ सोमवार का व्रत और पूजन किया जाता है। यह व्रत उन्हीं लोगों के घरों में होता है जिनके घर का कोई भी सदस्य श्री जगन्नाथ धाम की यात्रा कर आ चुका हो। इस व्रत में टेसु के पुष्प से पूजा करने का विधान है। इसलिए इस व्रत को तिसुआ सोमवार व्रत कहते हैं।

तिसुआ सोमवार व्रत कथा / Tisua Somvar Vrat Katha in Hindi PDF

चैत्र मास में आने वाले चारों सोमवार को तिसुआ सोमवार कहा जाता है। इन सोमवार को भगवान श्री जगन्नाथ की उपासना की जाती है। पहले सोमवार को गुड़ से, दूसरे सोमवार को गुड़ और धनिया से, तीसरे सोमवार को पंचामृत से तथा चौथे सोमवार को कच्‍चा पक्‍का, हर तरह का पकवान बनाकर भगवान को भोग लगाया जाता है। इसके पश्चात पूजा की जाती है। माना जाता है कि इन चारों सोमवार पर श्रद्धा के साथ व्रत रखने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि सुदामा ने सबसे पहले भगवान श्री जगन्नाथ का पूजन किया था। पूजन के लिए सुदामाजी जगन्नाथ धाम गए। रास्ते में कई पीड़ितों को आश्वासन दिया कि भगवान श्री जगन्नाथ के दरबार में उनके सुख के लिए मन्नत मांगेंगे। बताया जाता है सुदामा की श्रद्धा देखकर भगवान जगन्नाथपुरी के बाहर एक ब्राह्मण के भेष में खड़े हो गए। सुदामा ने ब्राह्मण से जगन्नाथ धाम का पता पूछा तो भगवान ने बताया कि उनके पीछे जो आग का गोला है उसमें प्रवेश करने के बाद ही भगवान के दर्शन होंगे। सुदामा आग के गोले में प्रविष्ट होने के लिए बढ़े तो भगवान ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए। सुदामा ने रास्ते में मिले सभी पीड़ितों के दुख दूर करने की प्रार्थना की तो भगवान जगन्नाथ ने उन्हें एक बेंत देकर कहा कि जिसे यह बेंत मारोगे उसके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। मान्यता है कि तब से चैत्र मास शुक्ल पक्ष शुरू होने पर श्रद्धालु भक्तिपूर्वक सोमवार को भगवान जगन्नाथ का पूजन-अर्चन करते हैं और उनके बेंत खाकर अपने कष्ट दूर करने की प्रार्थना करते हैं।

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