The Art of Public Speaking in Hindi PDF

The Art of Public Speaking in Hindi PDF Download

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The Art of Public Speaking in Hindi PDF Summary

Hello friends, today we are going to share The Art of Public Speaking in Hindi PDF for all of you. The book “The Art of Public Speaking” was written by the popular writer Dale Carnegie and J. and Berg Esenwein. Dale Harbison Carnegie is known as a famous and great American writer. He was the developer of renowned courses in self-improvement, salesmanship, corporate training, public speaking and interpersonal skills.

He was born into poverty on a Missouri farm. He was the author of the book How to Win Friends and Influence People which was written in 1936. How to Win Friends and Influence People is known as one of his best-selling books and is still very popular today. The Art of Public Speaking Book is also one of them which is based on an important topic.

This book can be one of the foundational and well-read books for anyone looking to pursue public speaking as a career. In this book, it has been taught how can a person improve their public speaking. If a person is shy or hesitant in speaking English or is unable to convey his point to another person, then he can easily learn Public Speaking through this book.

The Art of Public Speaking in Hindi PDF – The Art of Public Speaking Book PDF in Hindi

नीचे दिये गए महत्वपूर्ण बिन्दुओं का पालन करके आप अपने व्यक्तित्व को निखार कर अपने जीवन को दृण एवं मजबूत बना सकते हो। जो कि इस प्रकार है-

  • वक्ताओं के साथ सबसे बड़ी परेशानी यह है कि वह दर्शकों के सामने वह बिना कुछ सोचे समझे पहुँच जाते हैं। जिसके कारण वह अपनी बात एवं विचारों को उन तक पहुंचाने में असमर्थ होते हैं, इस समस्या से निपटने के लिए यह पुस्तक उनके लिए बहुत ही कारगर सिद्ध होगी।
  • दिमाग में अकसर ऐसे विचार आते हैं कि क्या मैं सही कर रहा हूँ? मेरे बाल कैसे दिख रहे हैं? ऐसे वक्ताओं के  विष्यसूचक विचार अकसर सही सिद्ध हो जाते हैं और जाने-अनजाने गलतियाँ हो जाती हैं। अर्थात् भाषण से पहले नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए।
  • किसी भी विषय की संपूर्ण जानकारी होना पर्याप्त तैयारी नहीं मानी जा सकती। आत्मविश्वास हासिल करने के लिए विषय विशेष तौर पर व्यक्ति की पकड़ मजबूत होनी चाहिए।
  • बिना तैयारी या विषय के बारे में कम जानकारी के साथ दर्शकों के सामने पहुँचने पर वक्ता व्याकुल प्रतीत होता है। जिसके कारण दर्शकों का समय खराब करने के लिए उसे शर्म का भी आभास होता है। इसलिए बेहतर है कि उचित तैयारी के साथ मंच पर पहुँचा जाए।
  • वक्ता के व्यवहार में नम्रता होना गलत नहीं है, लेकिन व्यवहार में दरशाई गई नम्रता में दब्बूपन का अहसास नहीं होना चाहिए।
  • व्यक्ति को हमेशा भाषण से पहले विचार प्रस्तुत करने का अंदाज निश्चित कर लेना चाहिए। शुरुआती वाक्यों की तैयारी बेहद अच्छी होनी चाहिए। ऐसा करने से भाषण के शुरुआत में सही और सटीक शब्द खोजने में वक्त खराब नहीं होता। इसके अलावा, भाषण का विषय भी महत्वपूर्ण होना चाहिए जिससे व्यक्ति बाद में डरता एवं हिचकिचाता नहीं है।
  • बेहतर तैयारी के साथ-साथ व्यक्ति को अपने ऊपर पूरा भरोसा एवं उम्मीद रखनी चाहिए।
  • निर्भीक व्यवहार दर्शकों का ध्यान खींचने में सहायक साबित होता है; जबकि एक खरगोश-दिल डरपोक वक्ता मुसीबत को न्योता देता है। इसीलिए अपने मन से डर को निकाल देना चाहिए।

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