सुन्दर कांड पाठ | Sundar Kand PDF in Hindi

सुन्दर कांड पाठ | Sundar Kand Hindi PDF Download

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सुन्दर कांड पाठ | Sundar Kand Hindi PDF Summary

नमस्कार दोस्तों, इस लेख के माध्यम से हम आपको सुन्दर कांड पाठ PDF / Sundar Kand PDF in Hindi के लिए डाउनलोड लिंक दे रहे हैं। सुंदर कांड पाठ करने से भगवान बजरंगबली प्रसन्न होते हैं तथा अपने भक्तो के सरे दुःख तकलीभों को नष्ट कर देते हैं। मनुष्य को हनुमान जी का नाम लेने मात्र से बुरी और नकारात्मक शक्तियाँ दूर भाग जाती है। वही सुन्दर कांड पाठ का नियमित पाठ करने से हर तरह से बाधाओ के मुक्ति पायी जाती है। श्री रामचरितमानस के सुन्दर कांड अध्याय में हनुमान जी की महिमा का विस्तृत रूप से बखान किया गया है। इसमें विशेष रूप से हनुमान जी के विजय का गुणगान किया गया है। यहाँ से आप सुन्दरकाण्ड इन हिंदी PDF / Sundarkand PDF in Hindi बड़ी आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं वो भी बिना किसी परेशानी के।

यह कहा जाता है कि चालीस सप्ताह तक लगातार जो कोई श्रद्धापूर्वक सुंदरकाण्ड का पाठ करता है, तो उसके सभी मनोरथ पूरे होते हैं तथा जीवन के सभी कष्ट, दुःख, परेशानियाँ दूर हो जाती हैँ। कई ज्योतिषी भी विपरित परिस्थितियों में सुंदरकांड करने की ही सलाह देते हैं।

सुन्दर कांड पाठ PDF | Sundar Kand PDF in Hindi

1 – जगदीश्वर की वंदना

शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं
ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्।
रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं
वन्देऽहंकरुणाकरं रघुवरं भूपालचूडामणिम्॥1॥

2 – रघुनाथ जी से पूर्ण भक्ति की मांग

नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽस्मदीये
सत्यं वदामि च भवानखिलान्तरात्मा।
भक्तिं प्रयच्छ रघुपुंगव निर्भरां मे
कामादिदोषरहितंकुरु मानसं च॥2॥

3 – हनुमान जी का वर्णन

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं
रघुपतिप्रियभक्तंवातजातं नमामि॥3॥

4 – जामवंत के वचन हनुमान् जी को भाए

चौपाई :
जामवंत के बचन सुहाए,
सुनि हनुमंत हृदय अति भाए॥
तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई,
सहि दुख कंद मूल फल खाई ॥1॥

5 – हनुमान जी का प्रस्थान

जब लगि आवौं सीतहि देखी,
होइहि काजु मोहि हरष बिसेषी॥
यह कहि नाइ सबन्हि कहुँ माथा,
चलेउ हरषि हियँ धरि रघुनाथा ॥2॥

6 – हनुमान जी का पर्वत में चढ़ना

सिंधु तीर एक भूधर सुंदर,
कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर॥
बार-बार रघुबीर सँभारी,
तरकेउ पवनतनय बल भारी ॥3॥

7 – पर्वत का पाताल में धसना

जेहिं गिरि चरन देइ हनुमंता,
चलेउ सो गा पाताल तुरंता॥
जिमि अमोघ रघुपति कर बाना,
एही भाँति चलेउ हनुमाना॥4॥

8 – समुन्द्र का हनुमान जी को दूत समझना

जलनिधि रघुपति दूत बिचारी,
तैं मैनाक होहि श्रम हारी॥5॥

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सुन्दर कांड पाठ | Sundar Kand pdf

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