श्री राधा चालीसा / Shri Radha Chalisa PDF in Hindi

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श्री राधा चालीसा / Shri Radha Chalisa PDF in Hindi

Dear devotees, here we are offering श्री राधा चालीसा PDF / Shri Radha Chalisa in Hindi PDF. Shri Radha Rani Ji is the love of Lord Shri Krishna. She is one of the most worshipped deities all around the world. It is said that if one chants the name of Shri Radha Rani, he/she will always get her blessings along with Lord Shri Krishna. In some Brijwasi scriptures, It is described that Lord Krishna serves those who serve Shri Radha Rani Ji. This Radha Chalisa PDF in Hindi is very powerful and fruitful. You can also recite Shri Radha Aarti Lyrics in Hindi after completing Chalisa. Aradhana Saxena Shri Radha Chalisa / Aradhana Saxena श्री राधा चालीसा is one of the famous Shri Radha Chalisa Videos on YouTube. You can also download this melodious Shri Radha Chalisa PDF in Hindi / श्री राधा चालीसा PDF in Hindi by clicking on the download link given below in this article.

 

श्री राधा चालीसा PDF Download

प्यारे भक्तों, आज हम आपके लिए श्री राधा चालीसा पीडीऍफ़ Shri Radha Chalisa in Hindi PDF प्रस्तुत कर रहे हैं। इस सुन्दर राधा चालीसा का पाठ करने मात्र से आप श्री राधा रानी जी एवं श्री कृष्ण जी दोनों की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। माना जाता है कि जो श्री राधा जी की सेवा करते हैं उन भक्तों की सेवा हेतु स्वयं भगवन श्री कृष्ण तत्पर रहते हैं। यदि आप अपने जीवन में प्रेम व सौहार्द का अनुभव करना चाहते हैं तथा अपने परिवार में चली आ रही कलह से मुक्ति पाना चाहते हैं तो अभी नीचे दिए हुए डाउनलोड लिंक पर क्लिक करके श्री राधा चालीसा पीडीऍफ़ हिंदी में डाउनलोड करें और नित्य प्रतिदिन श्री राधा चालीसा आरती सहित पाठ करें। श्री राधा चालीसा को बहुत से भक्तगण श्री राधा चालीसा भजन भी कहते हैं ।

 

Shri Radha Chalisa Lyrics in Hindi / श्री राधा चालीसा लिरिक्स

 

॥ दोहा ॥

श्री राधे वृषभानुजा,भक्तनि प्राणाधार।

वृन्दावनविपिन विहारिणी,प्रणवों बारंबार॥

जैसो तैसो रावरौ,कृष्ण प्रिया सुखधाम।

चरण शरण निज दीजिये,सुन्दर सुखद ललाम॥

॥ चौपाई ॥

जय वृषभान कुँवरि श्री श्यामा।कीरति नंदिनि शोभा धामा॥

नित्य बिहारिनि श्याम अधारा।अमित मोद मंगल दातारा॥

रास विलासिनि रस विस्तारिनी।सहचरि सुभग यूथ मन भावनि॥

नित्य किशोरी राधा गोरी।श्याम प्राणधन अति जिय भोरी॥

करुणा सागर हिय उमंगिनि।ललितादिक सखियन की संगिनी॥

दिन कर कन्या कूल बिहारिनि।कृष्ण प्राण प्रिय हिय हुलसावनि॥

नित्य श्याम तुमरौ गुण गावें।राधा राधा कहि हरषावें॥

मुरली में नित नाम उचारे।तुव कारण प्रिया वृषभानु दुलारी॥

नवल किशोरी अति छवि धामा।द्युति लघु लगै कोटि रति कामा॥

गौरांगी शशि निंदक बढ़ना।सुभग चपल अनियारे नयना॥

जावक युग युग पंकज चरना।नूपुर धुनि प्रीतम मन हरना॥

संतत सहचरि सेवा करहीं।महा मोद मंगल मन भरहीं॥

रसिकन जीवन प्राण अधारा।राधा नाम सकल सुख सारा॥

अगम अगोचर नित्य स्वरूपा।ध्यान धरत निशदिन ब्रज भूपा॥

उपजेउ जासु अंश गुण खानी।कोटिन उमा रमा ब्रह्मानी॥

नित्यधाम गोलोक विहारिनी।जन रक्षक दुख दोष नसावनि॥

शिव अज मुनि सनकादिक नारद।पार न पायें शेष अरु शारद॥

राधा शुभ गुण रूप उजारी।निरखि प्रसन्न होत बनवारी॥

ब्रज जीवन धन राधा रानी।महिमा अमित न जाय बखानी॥

प्रीतम संग देई गलबाँही।बिहरत नित्य वृन्दाबन माँही॥

राधा कृष्ण कृष्ण कहैं राधा।एक रूप दोउ प्रीति अगाधा॥

श्री राधा मोहन मन हरनी।जन सुख दायक प्रफुलित बदनी॥

कोटिक रूप धरें नंद नन्दा।दर्श करन हित गोकुल चन्दा॥

रास केलि करि तुम्हें रिझावें।मान करौ जब अति दुख पावें॥

प्रफुलित होत दर्श जब पावें।विविध भाँति नित विनय सुनावें॥

वृन्दारण्य बिहारिनि श्यामा।नाम लेत पूरण सब कामा॥

कोटिन यज्ञ तपस्या करहू।विविध नेम व्रत हिय में धरहू॥

तऊ न श्याम भक्तहिं अपनावें।जब लगि राधा नाम न गावे॥

वृन्दाविपिन स्वामिनी राधा।लीला बपु तब अमित अगाधा॥

स्वयं कृष्ण पावैं नहिं पारा।और तुम्हैं को जानन हारा॥

श्री राधा रस प्रीति अभेदा।सारद गान करत नित वेदा॥

राधा त्यागि कृष्ण को भेजिहैं।ते सपनेहु जग जलधि न तरिहैं ॥

कीरति कुँवरि लाड़िली राधा।सुमिरत सकल मिटहिं भव बाधा॥

नाम अमंगल मूल नसावन।त्रिविध ताप हर हरि मन भावन॥

राधा नाम लेइ जो कोई।सहजहि दामोदर बस होई॥

राधा नाम परम सुखदाई।भजतहिं कृपा करहिं यदुराई॥

यशुमति नन्दन पीछे फिरिहैं।जो कोउ गधा नाम सुमिरिहैं॥

राम विहारिन श्यामा प्यारी।करहु कृपा बरसाने वारी॥

वृन्दावन है शरण तिहारौ।जय जय जय वृषभानु दुलारी॥

॥ दोहा ॥

श्रीराधासर्वेश्वरी ,रसिकेश्वर घनश्याम।

करहुँ निरंतर बास मैं,श्रीवृन्दावन धाम॥

 

राधा के पिता जी का क्या नाम था?

श्री राधा जी के पिता जी का नाम वृषभानु जी था।

राधा रानी की जाति क्या थी?

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, श्रीकृष्ण के बाएं अंग से एक सुंदर कन्या प्रकट हुई, प्रकट होते ही उसने भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में फूल अर्पित किए. श्रीकृष्ण से बात करते-करते वह उनके साथ सिंहासन पर बैठ गई. यह सुंदर कन्या ही राधा हैं.

राधा रानी किसका अवतार थी?

श्री राधा रानी जी श्री कृष्ण जी का ही एक अंश हैं।

राधा रानी भगवान श्री कृष्ण की कौन सी शक्ति है?

राधा जी कृष्ण जी कि अल्हादिनी शक्ति हैं। वह दोनों एक दूसरे से अलग हैं ही नहीं। ठीक वैसे जैसे शिव और हरि एक ही हैं

कृष्ण ने राधा से शादी क्यों नहीं की?

श्रीकृष्ण ने राधा से इसलिए विवाह नहीं किया क्योंकि वह साबित करना चाहते थे कि प्रेम और विवाह दो अलग-अलग चीजें हैं. प्रेम एक नि:स्वार्थ भावना है जबकि विवाह एक समझौता या अनुबंध है।

क्या श्री कृष्ण ने राधा जी से विवाह किया था?

पौराणिक कथाओं के अनुसार बृजमण्डल स्थित भांडीरवन नामक ग्राम में एक वृक्ष के नीचे राधा – कृष्ण का गन्धर्व विवाह हुआ था।

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श्री राधा चालीसा / Shri Radha Chalisa pdf

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