शिव शतनाम स्तोत्र | Shiv Shatnam Stotram PDF

शिव शतनाम स्तोत्र | Shiv Shatnam Stotram PDF Download

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शिव शतनाम स्तोत्र | Shiv Shatnam Stotram PDF Summary

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप शिव शतनाम स्तोत्र / Shiv Shatnam Stotram PDF प्राप्त कर सकते हैं। शिव शतनाम स्तोत्र एक ऐसा दिव्य स्तोत्र हैं जिसके माध्यम से आप प्रातःकाल शिव जी का ध्यान करके उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं। शिव जी को प्रसन्न करके आप समस्त प्रकार के भौतिक व मानसिक सुख प्राप्त कर सकते हैं।

यह एक सिद्ध स्तोत्र हैं जिसके द्वारा आप शिव जी को बहुत ही कम समय में प्रसन्न कर सकते हैं। इस स्तोत्र में शिव जी के विभिन्न पवित्र नामों को संगलित किया है, इसीलिए इस स्तोत्र को शिव शतनाम स्तोत्र कहा जाता हैं। भगवान् शिव आप पर अपनी कृपा सदैव बनी रहे ऐसी हम कामना करते हैं।

शिव शतनाम स्तोत्र | Shiv Shatnam Stotra Sanskrit PDF

श्रीगणेशाय नमः ।

देवा ऊचुः ।

जय शम्भो विभो रुद्र स्वयम्भो जय शङ्कर ।

जयेश्वर जयेशान जय सर्वज्ञ कामद ॥ १॥

नीलकण्ठ जय श्रीद श्रीकण्ठ जय धूर्जटे ।

अष्टमूर्तेऽनन्तमूर्ते महामूर्ते जयानघ ॥ २॥

जय पापहरानङ्गनिःसङ्गाभङ्गनाशन ।

जय त्वं त्रिदशाधार त्रिलोकेश त्रिलोचन ॥ ३॥

जय त्वं त्रिपथाधार त्रिमार्ग त्रिभिरूर्जित ।

त्रिपुरारे त्रिधामूर्ते जयैकत्रिजटात्मक ॥ ४॥

शशिशेखर शूलेश पशुपाल शिवाप्रिय ।

शिवात्मक शिव श्रीद सुहृच्छ्रीशतनो जय ॥ ५॥

सर्व सर्वेश भूतेश गिरिश त्वं गिरीश्वर ।

जयोग्ररूप मीमेश भव भर्ग जय प्रभो ॥ ६॥

जय दक्षाध्वरध्वंसिन्नन्धकध्वंसकारक ।

रुण्डमालिन् कपालिंस्थं भुजङ्गाजिनभूषण ॥ ७॥

दिगम्बर दिशां नाथ व्योमकश चिताम्पते ।

जयाधार निराधार भस्माधार धराधर ॥ ८॥

देवदेव महादेव देवतेशादिदैवत ।

वह्निवीर्य जय स्थाणो जयायोनिजसम्भव ॥ ९॥

भव शर्व महाकाल भस्माङ्ग सर्पभूषण ।

त्र्यम्बक स्थपते वाचाम्पते भो जगताम्पते ॥ १०॥

शिपिविष्ट विरूपाक्ष जय लिङ्ग वृषध्वज ।

नीललोहित पिङ्गाक्ष जय खट्वाङ्गमण्डन ॥ ११॥

कृत्तिवास अहिर्बुध्न्य मृडानीश जटाम्बुभृत् ।

जगद्भ्रातर्जगन्मातर्जगत्तात जगद्गुरो ॥ १२॥

पञ्चवक्त्र महावक्त्र कालवक्त्र गजास्यभृत् ।

दशबाहो महाबाहो महावीर्य महाबल ॥ १३॥

अघोरघोरवक्त्र त्वं सद्योजात उमापते ।

सदानन्द महानन्द नन्दमूर्ते जयेश्वर ॥ १४॥

एवमष्टोत्तरशतं नाम्नां देवकृतं तु ये ।

शम्भोर्भक्त्या स्मरन्तीह शृण्वन्ति च पठन्ति च ॥ १५॥

न तापास्त्रिविधास्तेषां न शोको न रुजादयः ।

ग्रहगोचरपीडा च तेषां क्वापि न विद्यते ॥ १६॥

श्रीः प्रज्ञाऽऽरोग्यमायुष्यं सौभाग्यं भाग्यमुन्नतिम् ।

विद्या धर्मे मतिः शम्भोर्भक्तिस्तेषां न संशयः ॥ १७॥

इति श्रीस्कन्दपुराणे सह्याद्रिखण्डे शिवाष्टोत्तरनामशतकस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

श्री शिव जी की आरती | Shri Shiv Ji Ki Aarti PDF

ॐ जय शिव ओंकारा,स्वामी जय शिव ओंकारा।

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,अर्द्धांगी धारा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुराननपञ्चानन राजे।

हंसासन गरूड़ासनवृषवाहन साजे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुजदसभुज अति सोहे।

त्रिगुण रूप निरखतेत्रिभुवन जन मोहे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमालामुण्डमाला धारी।

त्रिपुरारी कंसारीकर माला धारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बरबाघम्बर अंगे।

सनकादिक गरुणादिकभूतादिक संगे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमण्डलुचक्र त्रिशूलधारी।

सुखकारी दुखहारीजगपालन कारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिवजानत अविवेका।

मधु-कैटभ दो‌उ मारे,सुर भयहीन करे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

लक्ष्मी व सावित्रीपार्वती संगा

पार्वती अर्द्धांगी,शिवलहरी गंगा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती,शंकर कैलासा।

भांग धतूर का भोजन,भस्मी में वासा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंग बहत है,गल मुण्डन माला।

शेष नाग लिपटावत,ओढ़त मृगछाला॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजे विश्वनाथ,नन्दी ब्रह्मचारी।

नित उठ दर्शन पावत,महिमा अति भारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरतिजो कोइ नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी,मनवान्छित फल पावे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

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