शरद पूर्णिमा व्रत कथा | Sharad Purnima Vrat Katha PDF in Hindi

शरद पूर्णिमा व्रत कथा | Sharad Purnima Vrat Katha Hindi PDF Download

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शरद पूर्णिमा व्रत कथा | Sharad Purnima Vrat Katha Hindi PDF Summary

नमस्कार दोस्तों, इस लेख के माध्यम से हम आपको शरद पूर्णिमा व्रत कथा PDF / Sharad Purnima Vrat Katha PDF in Hindi के लिए डाउनलोड लिंक दे रहे हैं। हिन्दू धर्म में ग्रहों के पूजन का भी बहुत अधिक महत्व है। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रदेव की कृपा प्राप्ति हेतु शरद पूर्णिमा का व्रत किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रदेव अमृत वर्षा करते हैं। इसलिए बहुत सी जगह शरद पूर्णिमा की रात को खीर बना कर चन्द्रमा की रोशनी में उसे रखा जाता है। यहाँ से आप Sharad Purnima Vrat Katha in Hindi PDF बड़ी आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं वो भी बिना किसी परेशानी के।

अगर आप अपने जीवन में बहुत सी मानसिक परेशानियों से जूझ रहे हैं, तो शरद पूर्णिमा का व्रत जरूर करना चाहिए। विद्द्वानो के अनुसार कोई भी व्रत बिना व्रत कथा के पूरा नहीं माना जाता है। इसलिए शरद पूर्णिंमा व्रत की सफलता के लिए शरद पूर्णिमा व्रत कथा को अवश्य पढ़ना चाहिए। इस कथा को पढ़ने के बाद ही आपका व्रत पूरा माना जाता है।

शरद पूर्णिमा व्रत कथा PDF | Sharad Purnima Vrat Katha PDF in Hindi

एक कथा के अनुसार एक साहुकार को दो पुत्रियां थीं। दोनो पुत्रियां पूर्णिमा का व्रत रखती थीं। लेकिन बड़ी पुत्री पूरा व्रत करती थी और छोटी पुत्री अधूरा व्रत करती थी। इसका परिणाम यह हुआ कि छोटी पुत्री की संतान पैदा होते ही मर जाती थी।

उसने पंडितों से इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया की तुम पूर्णिमा का अधूरा व्रत करती थी, जिसके कारण तुम्हारी संतान पैदा होते ही मर जाती है। पूर्णिमा का पूरा व्रत विधिपूर्वक करने से तुम्हारी संतान जीवित रह सकती है।

उसने पंडितों की सलाह पर पूर्णिमा का पूरा व्रत विधिपूर्वक किया। बाद में उसे एक लड़का पैदा हुआ। जो कुछ दिनों बाद ही फिर से मर गया। उसने लड़के को एक पाटे (पीढ़ा) पर लेटा कर ऊपर से कपड़ा ढंक दिया। फिर बड़ी बहन को बुलाकर लाई और बैठने के लिए वही पाटा दे दिया। बड़ी बहन जब उस पर बैठने लगी जो उसका घाघरा बच्चे का छू गया।

बच्चा घाघरा छूते ही रोने लगा। तब बड़ी बहन ने कहा कि तुम मुझे कलंक लगाना चाहती थी। मेरे बैठने से यह मर जाता। तब छोटी बहन बोली कि यह तो पहले से मरा हुआ था। तेरे ही भाग्य से यह जीवित हो गया है। तेरे पुण्य से ही यह जीवित हुआ है।

उसके बाद नगर में उसने पूर्णिमा का पूरा व्रत करने का ढिंढोरा पिटवा दिया।

चंद्रदेव की आरती PDF | Chandra Dev Ki Aarti PDF in Hindi

ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।

दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी।

रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी।

दीन दयाल दयानिधि, भव बंधन हारी।

जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे।

सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि।

योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें।

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, संत करें सेवा।

वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी।

प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी।

शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी।

धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे।

विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी।

सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें।

ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।

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शरद पूर्णिमा व्रत कथा | Sharad Purnima Vrat Katha pdf

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