शनि प्रदोष व्रत कथा | Shani Pradosh Vrat Katha PDF in Hindi

शनि प्रदोष व्रत कथा | Shani Pradosh Vrat Katha Hindi PDF Download

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शनि प्रदोष व्रत कथा | Shani Pradosh Vrat Katha Hindi PDF Summary

नमस्कार पाठकों, प्रस्तुत लेख में हम आपके लिये शनि प्रदोष व्रत कथा pdf की जानकारी प्रदान कर रहे हैं। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। शनिवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोष व्रत कह जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ शनि देव की पूजा भी की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, शनि प्रदोष व्रत के दिन शनि देव को काला तिल, काला वस्त्र, तेल, उड़द की दाल अर्पित करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शनि देव को ये चीजें अर्पित करने से भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। यहाँ से आप शनि प्रदोष व्रत कथा पीडीऍफ़ हिंदी भाषा में बड़ी आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं। जानिए प्रदोष व्रत के दिन शनिदेव को प्रसन्न कैसे करें।

जिन लोगों को शनि कृपा पानी है उन्हें शनि अष्टक तथा शनि सहस्त्रनामावली का पाठ करना चाहिए। इसके अलावा शनि कवच स्तोत्र सभी संकटों से हमारी रक्षा करते है साथ ही शनि अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का गायन भी बहुत लाभकारी होता है   महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र एक ऐसा स्तोत्र जो अकाल मृत्यु जैसे दोष से भी मुक्ति दिला देता है।

 

शनि प्रदोष व्रत कथा, तरीका और पूजा विधि | Shani Pradosh Vrat Pooja Vidhi PDF

शनि प्रदोष व्रत खास तौर पर शनि की दशा को दूर करने के लिए किया जाता है। इस दिन शनि स्त्रोत का पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है। मान्यता है कि यह व्रत करने से पुत्र की प्राप्ति होती है। इस दिन यदि शनि से संबंधित कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो दुर्भाग्य भी दूर होता है। इस दिन बिना जल पिए व्रत रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन बूंदी के लड्डू यदि काली गाय को खिलाएंगे तो भाग्योदय होगा। इसके साथ ही काले कुत्ते को तेल से चुपड़ी हुई रोटी खिलानी चाहिए। शनि प्रदोष के दिन कम से कम एक माला शनि मंत्र का जाप करना चाहिए। जाप के दौरान उच्चारण शुद्ध रहना चाहिए। इसके अलावा गरीब को तेल में बने खाद्य पदार्थ खिलाएं।

शनि प्रदोष व्रत पूजा विधि | Shani Pradosh Vrat Pooja Vidhi

  • प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ कपड़े धारण करें।
  • भगवान शंकर और माता पार्वती को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं।
  • अब भगवान को बेल पत्र, गंध, अक्षत , फूल, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग), फल, पान, सुपारी, लौंग व इलायची अर्पित करें।
  • शाम को भगवान शिव की इसी तरह पूजा करें और पुनः एक बार उक्त सभी सामग्री भगवान को अर्पित करें। इस दिन अगर संभव हो
  • तो इस दिन कांसे की कटोरी में तिल का तेल लेकर अपना चेहरा देखना चाहिये और जो भी शनिदेव के नाम का दान स्वीकार करता हो उसे तेल दान कर दें।
  • इस दिन बूंदी के लड्डू काली गाय को और काले कुत्ते को तेल से चुपड़ी हुई रोटी खिलाने से भाग्योदय होता है।
  • शनि प्रदोष के दिन कम से कम एक माला शनि मंत्र का जाप करना चाहिए।
  • गरीब को तेल में बने खाद्य पदार्थ खिलाएं।
  • शनिदेव की प्रतिमा को देखते समय भगवान की आंखों में नहीं देखें।
  • इस दिन पीपल को जल देने से भी शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

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