सावन सोमवार व्रत कथा | Shravan Somvar Vrat Katha PDF in Hindi

सावन सोमवार व्रत कथा | Shravan Somvar Vrat Katha Hindi PDF Download

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सावन सोमवार व्रत कथा | Shravan Somvar Vrat Katha Hindi PDF Summary

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप श्रावण सोमवार व्रत कथा PDF / Shravan Somvar Vrat Katha PDF प्राप्त कर सकते हैं। जैसा कि आप जानते हैं श्रावण माह शिवभक्तों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रावण माह को समान्यतः सावन माह के नाम से भी जाना जाता है। यदि आप भगवान शिव को सरलता से प्रसन्न करना चाहते हैं तो श्रावण माह आपके लिए सर्वाधिक उपयुक्त सिद्ध होगा।

भगवान भोलेनाथ तो वैसे भी सरलता से ही प्रसन्न हो जाते हैं किन्तु फिर भी यदि आप श्रावण माह में पूर्ण श्रद्धा भाव से भगवान भोलेनाथ जी की आराधना करते हैं, तो आपके कठिन से कठिन कार्य जो लंबे समय से असफल हो रहे हों, सफल हो जाते हैं। यही नहीं यदि आप नियमित रूप से शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं तो आप विभिन्न रोगों से भी मुक्त हो सकते हैं।

यदि आप श्रावण माह में प्रतिदिन शिव आराधना कर सकने में असमर्थ हैं तो आप इस माह के प्रत्येक सोमवार के दिन व्रत व पूजन कर सकते हैं। इसके लिए आप इस लेख में दी गयी सावन सोमवार व्रत कथा pdf download करें तथा सोमवार के दिन उसके पाठ के साथ सावन सोमवार व्रत व पूजा करें।

सावन सोमवार व्रत कथा PDF / Shravan (Sawan) Somvar Vrat Katha PDF

सावन सोमवार व्रत कथा इस प्रकार है- एक समय की बात है, किसी नगर में एक साहूकार रहता था। उसके घर में धन की कोई कमी नहीं थी लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी इस कारण वह बहुत दुखी था। पुत्र प्राप्ति के लिए वह प्रत्येक सोमवार व्रत रखता था और पूरी श्रद्धा के साथ शिव मंदिर जाकर भगवान शिव और पार्वती जी की पूजा करता था। उसकी भक्ति देखकर एक दिन मां पार्वती प्रसन्न हो गईं और भगवान शिव से उस साहूकार की मनोकामना पूर्ण करने का आग्रह किया।

पार्वती जी की इच्छा सुनकर भगवान शिव ने कहा कि ‘हे पार्वती, इस संसार में हर प्राणी को उसके कर्मों का फल मिलता है और जिसके भाग्य में जो हो उसे भोगना ही पड़ता है।’ लेकिन पार्वती जी ने साहूकार की भक्ति का मान रखने के लिए उसकी मनोकामना पूर्ण करने की इच्छा जताई, माता पार्वती के आग्रह पर शिवजी ने साहूकार को पुत्र-प्राप्ति का वरदान तो दिया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उसके बालक की आयु केवल बारह वर्ष होगी।

माता पार्वती और भगवान शिव की बातचीत को साहूकार सुन रहा था। उसे ना तो इस बात की खुशी थी और ना ही दुख। वह पहले की भांति शिवजी की पूजा करता रहा। कुछ समय के बाद साहूकार के घर एक पुत्र का जन्म हुआ। जब वह बालक ग्यारह वर्ष का हुआ तो उसे पढ़ने के लिए काशी भेज दिया गया। साहूकार ने पुत्र के मामा को बुलाकर उसे बहुत सारा धन दिया और कहा कि तुम इस बालक को काशी विद्या प्राप्ति के लिए ले जाओ और मार्ग में यज्ञ कराना।

जहां भी यज्ञ कराओ वहां ब्राह्मणों को भोजन कराते और दक्षिणा देते हुए जाना। दोनों मामा-भांजे इसी तरह यज्ञ कराते और ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देते काशी की ओर चल पड़े। रात में एक नगर पड़ा जहां नगर के राजा की कन्या का विवाह था। लेकिन जिस राजकुमार से उसका विवाह होने वाला था वह एक आंख से काना था। राजकुमार के पिता ने अपने पुत्र के काना होने की बात को छुपाने के लिए एक चाल सोची। साहूकार के पुत्र को देखकर उसके मन में एक विचार आया।

उसने सोचा क्यों न इस लड़के को दूल्हा बनाकर राजकुमारी से विवाह करा दूं। विवाह के बाद इसको धन देकर विदा कर दूंगा और राजकुमारी को अपने नगर ले जाऊंगा। लड़के को दूल्हे के वस्त्र पहनाकर राजकुमारी से विवाह कर दिया गया। लेकिन साहूकार का पुत्र ईमानदार था। उसे यह बात न्यायसंगत नहीं लगी। उसने अवसर पाकर राजकुमारी की चुन्नी के पल्ले पर लिखा कि ‘तुम्हारा विवाह तो मेरे साथ हुआ है लेकिन जिस राजकुमार के संग तुम्हें भेजा जाएगा वह एक आंख से काना है। मैं तो काशी पढ़ने जा रहा हूं। जब राजकुमारी ने चुन्नी पर लिखी बातें पढ़ी तो उसने अपने माता-पिता को यह बात बताई।

राजा ने अपनी पुत्री को विदा नहीं किया जिससे बारात वापस चली गई। दूसरी ओर साहूकार का लड़का और उसका मामा काशी पहुंचे और वहां जाकर उन्होंने यज्ञ किया। जिस दिन लड़के की आयु 12 साल की हुई उसी दिन यज्ञ रखा गया। लड़के ने अपने मामा से कहा कि मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं है। मामा ने कहा कि तुम अंदर जाकर सो जाओ। शिवजी के वरदानुसार कुछ ही देर में उस बालक के प्राण निकल गए। मृत भांजे को देख उसके मामा ने विलाप शुरू किया। संयोगवश उसी समय शिवजी और माता पार्वती उधर से जा रहे थे। पार्वती ने भगवान से कहा- स्वामी, मुझे इसके रोने के स्वर सहन नहीं हो रहा. आप इस व्यक्ति के कष्ट को अवश्य दूर करें।

जब शिवजी मृत बालक के समीप गए तो वह बोले कि यह उसी साहूकार का पुत्र है, जिसे मैंने 12 वर्ष की आयु का वरदान दिया। अब इसकी आयु पूरी हो चुकी है। लेकिन मातृ भाव से विभोर माता पार्वती ने कहा कि हे महादेव, आप इस बालक को और आयु देने की कृपा करें अन्यथा इसके वियोग में इसके माता-पिता भी तड़प-तड़प कर मर जाएंगे। माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने उस लड़के को जीवित होने का वरदान दिया। शिवजी की कृपा से वह लड़का जीवित हो गया।

शिक्षा समाप्त करके लड़का मामा के साथ अपने नगर की ओर चल दिया। दोनों चलते हुए उसी नगर में पहुंचे, जहां उसका विवाह हुआ था। उस नगर में भी उन्होंने यज्ञ का आयोजन किया। उस लड़के के ससुर ने उसे पहचान लिया और महल में ले जाकर उसकी खातिरदारी की और अपनी पुत्री को विदा किया। इधर साहूकार और उसकी पत्नी भूखे-प्यासे रहकर बेटे की प्रतीक्षा कर रहे थे।

उन्होंने प्रण कर रखा था कि यदि उन्हें अपने बेटे की मृत्यु का समाचार मिला तो वह भी प्राण त्याग देंगे परंतु अपने बेटे के जीवित होने का समाचार पाकर वह बेहद प्रसन्न हुए। उसी रात भगवान शिव ने व्यापारी के स्वप्न में आकर कहा- हे श्रेष्ठी, मैंने तेरे सोमवार के व्रत करने और व्रतकथा सुनने से प्रसन्न होकर तेरे पुत्र को लम्बी आयु प्रदान की है। इसी प्रकार जो कोई सोमवार व्रत करता है या कथा सुनता और पढ़ता है उसके सभी दुख दूर होते हैं और समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

सावन सोमवार व्रत पूजा विधि PDF / Sawan Somvar Vrat Puja Vidhi PDF

शिव पूजा में अभिषेक का विशेष महत्व हैं जिसे रुद्राभिषेक कहा जाता हैं। प्रति दिन रुद्राभिषेक करने का नियम पालन किया जाता हैं। रुद्राभिषेक करने की विधि इस प्रकार है।

  • सर्वप्रथम प्रातः स्नान आदि से मुक्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • सर्वप्रथम शिवलिंग को जल से स्नान कराएं, तत्पश्चात क्रमशः दूध, दही, शहद, शुद्ध घी, शक्कर (इन पांच अमृत जिन्हें मिलाकर पंचामृत कहा जाता हैं) के द्वारा शिवलिंग को स्नान कराएं।
  • पुनः जल से स्नान कराकर उन्हें शुद्ध करें।
  • तदोपरांत शिवलिंग पर चन्दन का लैप अर्पित करें।
  • तत्पश्चात जनेऊ अर्पित करें।
  • शिव जी पर कुमकुम एवं सिंदूर नहीं चढ़ाया जाता। अतः अब उन्हें अबीर अर्पित करें।
  • अब शिवलिंग पर बैल पत्र, अकाव के पुष्प, धतूरे का पुष्प एवं फल अर्पित करें।
  • शिव जी के पूजन में शमी पत्र का विशेष महत्व होता हैं। धतूरे एवं बैल पत्र से भी शिव जी को प्रसन्न किया जाता हैं। शमी के पत्र को स्वर्ण के तुल्य माना जाता हैं।
  • इस सम्पूर्ण पूजन के दौरान मानसिक रूप से किसी शिव मंत्र अथवा “ॐ नम: शिवाय मंत्र” का जाप करते रहें।
  • इसके पश्चात् माता गौरी का पूजन किया जाता हैं।
  • अंत में आरती के साथ पूजन का समापन करें।

सावन सोमवार व्रत का महत्व PDF / Sawan Ke Somvar Vrat Ka Mahatva PDF

  • सावन का महीना शिव जी का प्रिय महीना होता है।
  • सोमवार का स्वामी भगवान शिव को माना जाता हैं।
  • पूरे वर्ष में सोमवार को शिव भक्ति के लिए उत्तम माना जाता हैं।
  • अत: शिव प्रिय होने के कारण श्रावण के सोमवार का महत्व अधिक बढ़ जाता हैं।
  • श्रावण में पाँच अथवा चार सोमवार आते हैं, जिनमे एक्श्ना अथवा पूर्ण व्रत रखा जाता हैं।
  • एक्श्ना में संध्या काल में पूजा के बाद भोजन ग्रहण किया जाता हैं।
  • शिव जी की पूजा का समय प्रदोषकाल में होती हैं।
  • अनेक स्थानों पर श्रावण सोमवार के दिन विद्यालयों का अर्धावकाश होता हैं।
  • ऐसी मान्यता है कि जो लोग सावन के महीने में माँ पार्वती ने कठोर तप करके भगवान शिव को प्राप्त किया था।
  • सावन के महीने में जो भक्त सोमवार का व्रत रखकर भगवान शिव का विधि विधान से पूजा और जलाभिषेक करते हैं उन पर भगवान भोले प्रसन्न होते हैं और उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है।
  • विवाह योग्य कन्याएँ यदि श्रावण माह में सोमवार का व्रत रख कर माँ पार्वती और भोले शंकर की उपासना करती हैं तो उनके मनवांछित वर की प्राप्ति होती है।

सावन सोमवार व्रत कथा आरती सहित PDF / Sawan Somvar Vrat Aarti in Hindi PDF

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।

ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।

हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।

त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥

अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।

चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।

सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।

जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।

प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।

नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।

कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥

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