सत्यनारायण पूजा विधि | Satyanarayan Puja Vidhi PDF in Hindi

सत्यनारायण पूजा विधि | Satyanarayan Puja Vidhi Hindi PDF Download

सत्यनारायण पूजा विधि | Satyanarayan Puja Vidhi in Hindi PDF download link is given at the bottom of this article. You can direct download PDF of सत्यनारायण पूजा विधि | Satyanarayan Puja Vidhi in Hindi for free using the download button.

सत्यनारायण पूजा विधि | Satyanarayan Puja Vidhi Hindi PDF Summary

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप सत्यनारायण पूजा विधि / Satyanarayan Puja Vidhi PDF प्राप्त कर सकते हैं। सत्यनारायण भगवान् को भगवान् श्री हरी विष्णु जी का ही एक रूप माना जाता है। यदि आप भी भगवान् श्री सत्यनारायण जी का पूजन अपने घर पर करना चाहते हैं, तो यहां दी गयी पूजा विधि का प्रयोग अवश्य करें।

सत्यनारायण भगवान् का पूजन विधि – विधान से करने से व्यक्ति के घर में धन – धान्य के भण्डार भर जाते हैं तथा मन समस्त इच्छाएं श्री सत्यनारायण भगवान् जी की कृपा से दूर हो जाती हैं। यह पूजन समस्त प्रकार के कष्टों को हरने वाला है तथा मनुष्य का कल्याण करने वाला है अतः आपको भी श्री सत्यनारायण जी का पूजन अवश्य करना चाहिए।

सत्यनारायण भगवान् की पूजन विधि | Satyanarayan Puja Vidhi in Hindi PDF

  • पूजन स्थल को गाय के गोबर से पवित्र करके वहां एक अल्पना बनाएं।
  • उस पर पूजा की चौकी रखें।
  • इस चौकी के चारों पाये के पास केले का वृक्ष लगाएं।
  • इस चौकी पर शालिग्राम या ठाकुर जी या श्री सत्यनारायण की प्रतिमा स्थापित करें।
  • पूजा करते समय सबसे पहले गणपति की पूजा करें फिर इन्द्रादि दशदिक्पाल की और क्रमश: पंच लोकपाल, सीता सहित राम, लक्ष्मण की, राधा कृष्ण की।
  • इनकी पूजा के पश्चात ठाकुर जी व सत्यनारायण की पूजा करें।
  • इसके बाद लक्ष्मी माता की और अंत में महादेव और ब्रह्मा जी की पूजा करें।
  • पूजा के बाद सभी देवों की आरती करें और चरणामृत लेकर प्रसाद वितरण करें।
  • पुरोहित जी को दक्षिणा एवं वस्त्र दे व भोजन कराएं।
  • पुराहित जी के भोजन के पश्चात उनसे आशीर्वाद लेकर आप स्वयं भोजन करें।

सत्यनारायण व्रत कथा | Shri Satyanarayan Vrat Katha

सत्यनारायण व्रत कथा का पूरा सन्दर्भ यह है कि पुराकालमें शौनकादिऋषि नैमिषारण्य स्थित महर्षि सूत के आश्रम पर पहुँचे। ऋषिगण महर्षि सूत से प्रश्न करते हैं कि लौकिक कष्टमुक्ति, सांसारिक सुख समृद्धि एवं पारलौकिक लक्ष्य की सिद्धि के लिए सरल उपाय क्या है? महर्षि सूत शौनकादिऋषियों को बताते हैं कि ऐसा ही प्रश्न नारद जी ने भगवान विष्णु से किया था। भगवान विष्णु ने नारद जी को बताया कि लौकिक क्लेशमुक्ति, सांसारिक सुखसमृद्धि एवं पारलौकिक लक्ष्य सिद्धि के लिए एक ही राजमार्ग है, वह है सत्यनारायण व्रत। सत्यनारायण का अर्थ है सत्याचरण, सत्याग्रह, सत्यनिष्ठा। संसार में सुखसमृद्धि की प्राप्ति सत्याचरणद्वारा ही संभव है। सत्य ही ईश्वर है। सत्याचरण का अर्थ है ईश्वराराधन, भगवत्पूजा।

कथा का प्रारम्भ सूत जी द्वारा कथा सुनाने से होता है। नारद जी भगवान श्रीविष्णु के पास जाकर उनकी स्तुति करते हैं। स्तुति सुनने के अनन्तर भगवान श्रीविष्णु जी ने नारद जी से कहा- महाभाग! आप किस प्रयोजन से यहाँ आये हैं, आपके मन में क्या है? कहिये, वह सब कुछ मैं आपको बताउँगा।

नारद जी बोले – भगवन! मृत्युलोक में अपने पापकर्मों के द्वारा विभिन्न योनियों में उत्पन्न सभी लोग बहुत प्रकार के क्लेशों से दुखी हो रहे हैं। हे नाथ! किस लघु उपाय से उनके कष्टों का निवारण हो सकेगा, यदि आपकी मेरे ऊपर कृपा हो तो वह सब मैं सुनना चाहता हूँ। उसे बतायें।

श्री भगवान ने कहा – हे वत्स! संसार के ऊपर अनुग्रह करने की इच्छा से आपने बहुत अच्छी बात पूछी है। जिस व्रत के करने से प्राणी मोह से मुक्त हो जाता है, उसे आपको बताता हूँ, सुनें। हे वत्स! स्वर्ग और मृत्युलोक में दुर्लभ भगवान सत्यनारायण का एक महान पुण्यप्रद व्रत है। आपके स्नेह के कारण इस समय मैं उसे कह रहा हूँ। अच्छी प्रकार विधि-विधान से भगवान सत्यनारायण व्रत करके मनुष्य शीघ्र ही सुख प्राप्त कर परलोक में मोक्ष प्राप्त कर सकता है।

भगवान की ऐसी वाणी सनुकर नारद मुनि ने कहा -प्रभो इस व्रत को करने का फल क्या है? इसका विधान क्या है? इस व्रत को किसने किया और इसे कब करना चाहिए? यह सब विस्तारपूर्वक बतलाइये।

श्री भगवान ने कहा – यह सत्यनारायण व्रत दुख-शोक आदि का शमन करने वाला, धन-धान्य की वृद्धि करने वाला, सौभाग्य और सन्तान देने वाला तथा सर्वत्र विजय प्रदान करने वाला है। जिस-किसी भी दिन भक्ति और श्रद्धा से समन्वित होकर मनुष्य ब्राह्मणों और बन्धुबान्धवों के साथ धर्म में तत्पर होकर सायंकाल भगवान सत्यनारायण की पूजा करे। नैवेद्य के रूप में उत्तम कोटि के भोजनीय पदार्थ को सवाया मात्रा में भक्तिपूर्वक अर्पित करना चाहिए। केले के फल, घी, दूध, गेहूँ का चूर्ण अथवा गेहूँ के चूर्ण के अभाव में साठी चावल का चूर्ण, शक्कर या गुड़ – यह सब भक्ष्य सामग्री सवाया मात्रा में एकत्र कर निवेदित करनी चाहिए।

बन्धु-बान्धवों के साथ श्री सत्यनारायण भगवान की कथा सुनकर ब्राह्मणों को दक्षिणा देनी चाहिए। तदनन्तर बन्धु-बान्धवों के साथ ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। भक्तिपूर्वक प्रसाद ग्रहण करके नृत्य-गीत आदि का आयोजन करना चाहिए। तदनन्तर भगवान सत्यनारायण का स्मरण करते हुए अपने घर जाना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्यों की अभिलाषा अवश्य पूर्ण होती है। विशेष रूप से कलियुग में, पृथ्वीलोक में यह सबसे छोटा सा उपाय है।

You can download Satyanarayan Puja Vidhi in Hindi PDF by clicking on the following download button.

सत्यनारायण पूजा विधि | Satyanarayan Puja Vidhi PDF Download Link

REPORT THISIf the download link of सत्यनारायण पूजा विधि | Satyanarayan Puja Vidhi PDF is not working or you feel any other problem with it, please Leave a Comment / Feedback. If सत्यनारायण पूजा विधि | Satyanarayan Puja Vidhi is a copyright material Report This. We will not be providing its PDF or any source for downloading at any cost.

RELATED PDF FILES

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *