राहु स्तोत्र | Rahu Stotram PDF in Hindi

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राहु स्तोत्र | Rahu Stotram Hindi PDF Summary

नमस्कार पाठकों, इस लेख के द्वारा आप राहु स्तोत्र PDF निशुल्क प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी व्यक्ति की कुंडली में राहु ग्रह का एक बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है। राहु व्यक्ति के विचारों को प्रभावित करता है तथा लोगों के मस्तिष्क को भ्रमित करता है। यदि राहु ग्रह आपकी कुंडली में प्रतिकूल स्थिति में है तथा नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है, तो आपको इस राहु कवच स्तोत्र PDF का पाठ अवश्य करना चाहिए। इस स्तोत्र के प्रभाव से राहु द्वारा आपको प्रतिकूल परिणाम नहीं मिलेंगे।

हमने अपने पाठकों की सुविधा के लिए राहु स्तोत्र PDF तैयार की है तथा उसका लिंक इस लेख के अंत में दिया है। आप उस लिंक के माध्यम से इस स्तोत्र को प्राप्त कर सकते हैं तथा इसका पाठ कर सकते हैं। इस स्तोत्र का पाठ करने से आप राहु सम्बंधित समस्याओं से बच सकते हैं तथा जीवन में शांति का अनुभव कर सकते हैं।

 

राहु कवच स्तोत्र PDF / Rahu Stotram Lyrics in Sanskrit PDF

 

।। राहुस्तोत्रम् ।।

अथ राहुस्तोत्रप्रारम्भः ।

ॐ अस्य श्री राहुस्तोत्रमहामन्त्रस्य वामदेव ऋषिः ।

अनुष्टुप्च्छन्दः । राहुर्देवता ।

राहुप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।

काश्यप उवाच ।

श‍ृण्वन्तु मुनयः सर्वे राहुप्रीतिकरं स्तवम् ।

सर्वरोगप्रशमनं विषभीतिहरं परम् ॥ १॥

सर्वसम्पत्करं चैव गुह्यमेतदनुत्तमम् ।

आदरेण प्रवक्ष्यामि श्रूयतामवधानतः ॥ २॥

राहुः सूर्यरिपुश्चैव विषज्वाली भयाननः ।

सुधांशुवैरिः श्यामात्मा विष्णुचक्राहितो बली ॥ ३॥

भुजगेशस्तीक्ष्णदंष्ट्रः क्रूरकर्मा ग्रहाधिपः ।

द्वादशैतानि नामानि नित्यं यो नियतः पठेत् ॥ ४॥

जप्त्वा तु प्रतिमां रंयां सीसजां माषसुस्थिताम् ।

नीलैर्गन्धाक्षतैः पुष्पैः भक्त्या सम्पूज्य यत्नतः ॥ ५॥

विधिना वह्निमादाय दूर्वान्नाज्याहुतीः क्रमात्।

तन्मन्त्रेणैव जुहुयाद्यावदष्टोत्तरं शतम् ॥ ६॥

हुत्वैवं भक्तिमान् राहुं प्रार्थयेद्ग्रहनायकम् ।

सर्वापद्विनिवृत्यर्थं प्राञ्जलिः प्रणतो नरः ॥ ७

राहो कराळवदन रविचन्द्रभयङ्कर ।

तमोरूप नमस्तुभ्यं प्रसादं कुरु सर्वदा ॥ ८॥

सिम्हिकासुत सूर्यारे सिद्धगन्धर्वपूजित ।

सिंहवाह नमस्तुभ्यं सर्वान्रोगान् निवारय ॥ ९॥

कृपाणफलकाहस्त त्रिशूलिन् वरदायक ।

गरळातिगराळास्य गदान्मे नाशयाखिलान् ॥ १०॥

स्वर्भानो सर्पवदन सुधाकरविमर्दन ।

सुरासुरवरस्तुत्य सर्वदा त्वं प्रसीद मे ॥ ११॥

इति सम्प्रार्थितो राहुः दुष्टस्थानगतोऽपि वा ।

सुप्रीतो जायते तस्य सर्वान् रोगान् विनाशयेत् ॥ १२॥

विषान्न जायते भीतिः महारोगस्य का कथा ।

सर्वान् कामानवाप्नोति नष्टं राज्यमवाप्नुयात् ॥ १३॥

एवं पठेदनुदिनं स्तवराजमेतं मर्त्यः प्रसन्न हृदयो विजितेन्द्रियो यः ।

आरोग्यमायुरतुलं लभते सुपुत्रान्सर्वे ग्रहा विषमगाः सुरतिप्रसन्नाः ॥ १४॥

इति राहुस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

 

राहु स्तोत्र के लाभ / Rahu Stotram Benefits in Hindi PDF

  • राहु स्तोत्रम के पाठ से जातक की कुंडली में राहु की स्थि प्रबल होती है।
  • राहु की अन्तर्दशा व महादशा में भी इसका लाभ होता है।
  • इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से मानसिक समस्याएं दूर होती हैं।
  • राहु की आराधना से जातक की निर्णय लेने की शक्ति बढ़ती है।
  • इस स्तोत्र के प्रभाव से आप राहु जनित समस्याओं से बच सकते हैं।

 

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