प्लेटो का शिक्षा सिद्धांत PDF

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प्लेटो का शिक्षा सिद्धांत PDF Summary

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप प्लेटो का शिक्षा सिद्धांत PDF के रूप में प्राप्त कर सकते हैं। प्लेटो , यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक , गणितज्ञ थे। उन्हें सुकरात के शिष्य एवं अरस्तु के गुरु के रूप में भी जाना जाता है। बाल्यावस्था से ही प्लेटो का झुकाव दर्शनशास्त्र की ओर था। दर्शनशास्त्र के अतिरिक्त प्लेटो अन्य विषयो में भी अत्यधिक ज्ञान रखते थे।
अपने गुरु सुकरात की मृत्यु के बाद प्लेटो ने लगभग 12 वर्षों तक अभ्यांत्रिक क्षेत्रों पर भ्रमण किया। उन्होने अपने जीवनकाल में गणित, ज्यामिति, भूगर्भशास्त्र, ज्योतिष तथा धर्म आदि विषयों में अत्यधिक ज्ञान अर्जित किया। उन्होने अनेकों विषयों पर अपने विचार व सिद्धान्त रखे जिनके माध्यम से आज भी मार्गदर्शन प्राप्त होता है।

प्लेटो का शिक्षा सिद्धांत PDF

  • शिक्षा का सिद्धांत न्याय सिद्धांत का तार्किक परिणाम:

अपने आदर्श राज्य को न्याय पर आधारित करने हेतु प्लेटो ने शिक्षा के महत्त्व को स्वीकार किया है। न्याय का अर्थ व्यक्तियों और वर्गों द्वारा अपने स्वभावानुकूल विशिष्ट कार्यों का सम्पन्न करना है। शिक्षा द्वारा व्यक्ति को विशिष्ट कार्य का प्रशिक्षण देकर कुशल व दक्ष बनाया जा सकता है। प्लेटो न्याय की रक्षा के लिए भी शिक्षा को आवश्यक मानता है।

  • नागरिकों को सदग्ग्ण्णी बनाना:

प्लेटो का शिक्षा-सिद्धांत इस बात पर आधारित है कि “सदग् णा ही ज्ञान है “ यदि सद्गुण ज्ञान है तो उसे सिखाया जा सकता है। नागरिकों को सद्गुणी बनाने के लिए शिक्षा की आवश्यकता है ताकि समाज के तीनों वर्ग सद्गुणी बनकर अपने-अपने कर्त्तव्यों को स्वेच्छा से पूरा कर सकें।

  • शिक्षा द्वारा व्यक्ति की आत्मा का विकास:

प्लेटो का मानना है कि मनुष्य की आत्मा में अनेक श्रेष्ठ तत्त्व निवास करते हैं। इन्हीं अन्तर्निहित तत्त्वों को बाहर निकाल कर सही दिशा में गतिमान करना ही प्लेटो की शिक्षा का उद्देश्य है। शिक्षा एक ऐसा वातावरण तैयार करती है जो आत्मा को अपने विकास के प्रत्येक स्तर पर सहायता करती है। शिक्षा के अभाव में मानव आत्मा पथभ्रष्ट हो सकती है, जो समाज और व्यक्ति दोनों के लिए घातक है।

  • शिक्षा व्यक्ति को सामाजिक बनाती है:

शिक्षा व्यक्ति के हृदय में समष्टि का भाव भरती है और उसे आत्मसंयम का पाठ पढ़ाती है। यह व्यक्ति को सत्यवादी और आज्ञाकारी होने की सीख देती है तथा अहंकार व स्वार्थ को त्याग कर परमार्थ की ओर प्रेरित करती है। शिक्षा व्यक्ति की सामाजिक चेतना को जगाकर विभिन्न वर्गों में सामंजस्य व एकता स्थापित करती है।

  • शिक्षा का राजनीतिक महत्त्व:

शिक्षा के द्वारा शासक व सैनिक वर्ग को प्रशिक्षण प्राप्त होता है और दार्शनिक शासक का जन्म होता है। शिक्षा लोगों को राजनीतिक जीवन में भाग लेने के योग्य बनाती है। राज्य के प्रत्येक वर्ग को उसके कर्त्तव्य से अवगत कराती है। यह व्यक्ति के राजनीतिक जीवन को परिशुद्ध कर राज्य को एकता के सूत्रा में बाँधती है।

  • शिक्षा का दार्शनिक महत्त्व:

शिक्षा अपने आप में एक अच्छाई है। इसका अन्तिम लक्ष्य उस चरम सत्य की खोज करना है जो काल और स्थान से परे है, जो सृष्टि की सभी वस्तुओं का मूल कारण है, जो अपनी विभूति से सदा देदीप्यमान होता है एवं जिसकी ज्योति से समस्त चराचर प्रकाशित होता रहता है। इसी चिरंतन, शाश्वत और अटल सत्य की खोज कर व्यक्ति पार्थिव जीवन की सीमाओं से ऊपर उठने का प्रयास करता है।

प्लेटो की प्रमुख कृतियों के नाम

सुकरात से सम्बन्धित रचनाएँ हैं। इन रचनाओं के विचार सुकरान्त के विचारों की ही अभिव्यक्ति है।

प्लेटो की प्रमुख रचनाएँ

1. अपोलॉजी  (Apology)
2. क्रीटो  (Crito)
3. यूथीफ्रो  (Euthyphro)
4. जोर्जियस  (Gorgias)
5. मीनो  (Meno)
6. प्रोटागोरस  (Protagoros)
7. सिंपोजियम  (Symposium)
8. फेडो  (Phaedo)
9. रिपब्लिक  (Republic)
10. फेड्रस  (Phaedrus)
11. कथोपकथन  (Dialogues)
12. पार्मिनीडिज  (Parmenides)
13. थीटिटस  (Theaetetus)
14. सोफिस्ट  (Sophist)
15. स्टेट्समैन  (Statesman)
16. फीलिबस  (Philobus)
17. टायमीयस  (Timaeus)
18. लॉज (Laws)
19. रिपब्लिक  (Republic)

प्लेटो की शिक्षा प्रणाली की विशेषताएँ

  • चरित्र निर्माण  पर बल : प्लेटो की शिक्षा का उद्देश्य नागरिकों को अच्छे या सद्गुणी बनाकर उन्हें राज्य के प्रति नि:स्वार्थ सेवा की भावना जगाना है। प्लेटो शिक्षा को एक ऐसा विद्यात्मक साधन मानता है जो नागरिकों का चरित्र निर्माण करती है।
  • राज्य द्वारा नियन्त्रित तथा अनिवार्य शिक्षा : प्लेटो शिक्षा को व्यक्तिगत क्षेत्र में नहीं छोड़ना चाहता। वह शिक्षा पर राज्य के नियन्त्रण का पक्षधर है। प्लेटो का मानना है कि राज्य के नियन्त्रण के अभाव में शिक्षा व्यक्तिगत हितों की ही पोषक होगी, सामाजिक हितों की नहीं। प्लेटो ने शिक्षा प्राप्त करना प्रत्येक परिवार व व्यक्ति के लिए अनिवार्य कर दिया है। राज्य की ओर से शिक्षा की अनिवार्य व्यवस्था हो गई है।
  • कला और साहित्य पर नियन्त्रण : प्लेटो काव्य और साहित्य पर कठोर नियन्त्रण का पक्षधर है। प्लेटो का उद्देश्य गन्दे साहित्य का निर्माण रोकना है। उसका उद्देश्य युवकों को बुरे रास्ते से हटाकर सद्मार्ग पर चलाना है ताकि वे अच्छे नागरिक बन सकें।
  • स्त्री-पुरुष दोनों के लिए समान शिक्षा : प्लेटो की शिक्षा योजना स्त्री और पुरुष दोनों के लिए है। प्लेटो स्त्री-पुरुष में कोई स्वाभाविक अन्तर नहीं मानता है। वह इस दृष्टि से एथेन्स की शिक्षा प्रणाली का दोष दूर कर देता है क्योंकि उस समय एथेन्स में केवल पुरुषों को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त था। प्लेटो का विश्वास था कि स्त्रिया भी राज्य को शक्तिशाली बनाने में योगदान दे सकती हैं। इसलिए दोनों को समान व अनिवार्य शिक्षा मिलनी ही चाहिए।
  • शिक्षा राज्य के कर्त्तव्य के रूप में : अपने आदर्श राज्य में व्यक्ति को गुणी से सामाजिक बनाने के लिए शिक्षा को अनिवार्य माना है अर्थात् शिक्षा व्यक्ति तथा समाज दोनों का निर्माण करती है। अत: प्लेटो शिक्षा को निजी हाथों में न सौंपकर राज्य को सौंपता है। प्लेटो का उद्देश्य योजनाबद्ध तरीके से नागरिकों में कर्त्तव्यभावना पैदा करके उन्हें समाज के अनुरूप बनाना है। सेबाइन ने लिखा है- “प्लेटो की राज्य नियन्त्रित शिक्षा प्रणाली एथेन्स की शैक्षणिक कार्यशैली का नया परिवर्तन था।”
  • शिक्षा मानसिक रोग का मानसिक उपचार है : प्लेटो सारी बुराई की जड़ अज्ञानता को मानता है। उसका कहना है कि शिक्षा द्वारा ही बुराइयों का अन्त किया जा सकता है। शिक्षा व्यक्ति के स्वभाव को राज्य के उद्देश्य के अनुकूल बदलत सकती है। बार्कर के अनुसार- “शिक्षा मानसिक रोग के उपचार के लिए एक मानसिक औषधि है।” अर्थात् यह मानसिक रोग का मानसिक उपचार है।
  • नैतिक विकास पर बल : प्लेटो की शिक्षा योजना ‘सद्गुण ही ज्ञान है’ के सिद्धांत को स्वीकार करके व्यक्ति के नैतिक विकास की परिस्थितियाँ पैदा करती है। प्लेटो कला व साहित्य के ऐसे अंशों पर प्रतिबन्ध लगाने का पक्षधर है जो नागरिकों के नैतिक गुणों का Ðास करते हों।
  • सर्वांगगीण विकास पर बल  : प्लेटो की शिक्षा प्रणाली व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक तीनों पक्षों के पूर्ण विकास पर बल देती है। प्लेटो की शिक्षा योजना व्यक्ति के प्रत्येक सद्गुण को विकसित करने का प्रयास करती है।
  • शिक्षा केवल उच्च वर्ग के लिए : प्लेटो की शिक्षा प्रणाली में उत्पादक वर्ग के लिए शिक्षा का कोई पाठ्यक्रम ही नहीें है। प्लेटो की शिक्षा का मुख्य उद्देश्य राजनेताओं का निर्माण करना है जिससे आदर्श राज्य का सपना साकार हो सके। अत: प्लेटो संरक्षक वर्ग के लिए शिक्षा की व्यवस्था करने का पक्षपाती है।
  • शिक्षा-योजना मनोवैज्ञानिक तत्त्वों पर आधारित है: प्लेटो ने मानव स्वभाव की प्रवृत्तियों और आत्मा के तीन तत्त्वों के अनुकूल ही अपनी शिक्षा व्यवस्था को आधारित किया है।
  • शिक्षा का पाठ्यक्रम आयु-भेद व वर्ग-भेद पर आधारित : प्लेटो ने शिक्षा प्रणाली के दो भाग किए हैं – प्राथमिक व उच्च शिक्षा। दोनो शिक्षा स्तरों का आधार आयु व वर्ग-भेद है। प्रारम्भिक शिक्षा नौजवानों के लिए जबकि उच्च शिक्षा प्रौढ़ावस्था का प्रशिक्षण है तथा शासक वर्ग का भी इसमें गणित, तर्क, दर्शन व विज्ञान का ज्ञान दिया जाता है।
  • प्लेटो की शिक्षा में सीखने की प्रक्रिया सरल से जटिल की और : प्लेटो की शिक्षा व्यवस्था में पाठ्यक्रम सरलता से जटिलता की आरे बढ़ता है। शिक्षा के प्रारम्भिक स्तर पर संगीत, साहित्य, व्यायाम आदि सरल विषय पढ़ाए जाते हैं, परन्तु बीस वर्ष के बाद गणित, विज्ञान आदि कुछ जटिल विषय और अन्त में 30 वर्ष बाद द्वन्द्व व दर्शन का ज्ञान कराया जाता है।
  • शिक्षा आजीवन प्रक्रिया : प्लेटो की शिक्षा योजना जीवनपर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया है। 35 वर्ष से 50 वर्ष तक मनुष्य दार्शनिक व व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करता है। उसके बाद अन्तिम सत्य की खोज करता है। अत:यह आजीवन प्रक्रिया है।
  • दार्शनिक शासक के लिए प्रशिक्षण : प्लेटो की शिक्षा का उद्देश्य एक ऐसे दार्शनिक शासक का निर्माण करना है जो सर्वगुणसम्पन्न हो और सैनिक व उत्पादक वर्ग पर समाज हित में पूर्ण नियन्त्रण व सभी वर्गों में एकता व सामंजस्य कायम रख सके।
  • शिक्षा में गणित को महत्त्व : प्लेटो की शिक्षा योजना में सबसे अधिक महत्त्व गणित को दिया गया है। प्लेटो ने अपनी अकादमी के बाहर दरवाजे पर ये शब्द लिखे थे- “जिसे अंकगणित का ज्ञान नहीं, वह इसमें प्रवेश नहीं कर सकता।” अत: प्लेटो ने सर्वाधिक महत्त्व गणित को दिया है।

प्लेटो के विचार

  • व्यक्ति दुसरो पर राज करना चाहता है वह कभी राज नहीं कर सकता। वैसे ही जैसे कोई व्यक्ति किसी को पढ़ाने का दबाव महसूस करके अच्छा शिक्षक नहीं बन सकता है।
  • थोड़ा सा जो अच्छे से किया जाए वो बेहतर है,बजाये बहुत कुछ अपूर्णता से करने से आदमी अपने भविष्य का निर्धारण अपनी शिक्षा के शुरुवात की दिशा से करता है।
  • काम करने का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शुरुवात है।
  • हम सीख नहीं रहे हैं, और जिसे हम सीखना कह रहे हैं वह केवल स्मरणशक्ति की एक प्रक्रिया है।
  • मनुष्य में ऐसी ताकत है जो आपको आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है या आपके पंख काटकर आगे बढ़ने के रास्ते बंद भी कर सकती है। ये आप पर निर्भर करता है कि आप कौन सी ताकत अपनाते है।
  • तीन चीजो से बनता है मनुष्य का व्यवहार-चाहत,भावनाए और जानकारी।
  • एक अच्छा निर्णय ज्ञान पर आधारित होता है नंबरों पर नहीं।

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