मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत विधि 2021 | Masik Durga Ashtami Puja Vidhi PDF in Hindi

मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत विधि 2021 | Masik Durga Ashtami Puja Vidhi Hindi PDF Download

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मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत विधि 2021 | Masik Durga Ashtami Puja Vidhi Hindi PDF Summary

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत विधि 2021 / Masik Durga Ashtami Puja Vidhi PDF प्राप्त कर सकते हैं। मासिक दुर्गाष्टमी व्रत करने से देवी माता की कृपा होती है। देवी दुर्गा के भक्तों के लिए इस मासिक दुर्गाष्टमी का बहुत अधिक महत्व है। देवी दुर्गा की कृपा से व्यक्ति के जीवन में आने वाले समस्त संकट कट जाते हैं।

देवी दुर्गा को देवी आदि शक्ति का ही एक उग्र रूप माना जाता है। जो व्यक्ति अपनी भक्ति से देवी दुर्गा जी को प्रसन्न कर लेता है, देवी माँ उसके सभी शत्रुओं का विनाश कर देती हैं। देवी दुर्गा अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न हो जाती हैं। आप भी मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत करके देवी माँ की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

मासिक दुर्गा अष्टमी पूजा विधि | Masik Durga Ashtami Vrat Vidhi PDF

  • दुर्गा अष्टमी के दिन सुबह उठें, गंगाजल डालकर स्नानादि करें।
  • लकड़ी के पाठ लें और उस पर लाल वस्त्र बिछाएं।
  • फिर मां दुर्गा के मंत्र का जाप करते हुए उनकी प्रतिमा या फोटो स्थापित करें।
  • लाल या ऊड़हल के फूल, सिंदूर, अक्षत, नैवेद्य, सिंदूर, फल, मिष्ठान आदि से मां दुर्गा के सभी स्वरूपों की पूजा करें।
  • फिर धूप-दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और आरती भी करना न भूलें।
  • इसके बाद हाथ जोड़ें और उनके समक्ष अपनी इच्छाएं रखें।
  • ऐसा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

दुर्गा माता की आरती | Maa Durga Ki Aarti Lyrics

जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी।

तुमको निशिदिन ध्यावत,हरि ब्रह्मा शिवरी॥

जय अम्बे गौरी

माँग सिन्दूर विराजत,टीको मृगमद को।

उज्जवल से दो‌उ नैना,चन्द्रवदन नीको॥

जय अम्बे गौरी

कनक समान कलेवर,रक्ताम्बर राजै।

रक्तपुष्प गल माला,कण्ठन पर साजै॥

जय अम्बे गौरी

केहरि वाहन राजत,खड्ग खप्परधारी।

सुर-नर-मुनि-जन सेवत,तिनके दुखहारी॥

जय अम्बे गौरी

कानन कुण्डल शोभित,नासाग्रे मोती।

कोटिक चन्द्र दिवाकर,सम राजत ज्योति॥

जय अम्बे गौरी

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे,महिषासुर घाती।

धूम्र विलोचन नैना,निशिदिन मदमाती॥

जय अम्बे गौरी

चण्ड-मुण्ड संहारे,शोणित बीज हरे।

मधु-कैटभ दो‌उ मारे,सुर भयहीन करे॥

जय अम्बे गौरी

ब्रहमाणी रुद्राणीतुम कमला रानी।

आगम-निगम-बखानी,तुम शिव पटरानी॥

जय अम्बे गौरी

चौंसठ योगिनी मंगल गावत,नृत्य करत भैरूँ।

बाजत ताल मृदंगा,अरु बाजत डमरु॥

जय अम्बे गौरी

तुम ही जग की माता,तुम ही हो भरता।

भक्‍तन की दु:ख हरता,सुख सम्पत्ति करता॥

जय अम्बे गौरी

भुजा चार अति शोभित,वर-मुद्रा धारी।

मनवान्छित फल पावत,सेवत नर-नारी॥

जय अम्बे गौरी

कन्चन थाल विराजत,अगर कपूर बाती।

श्रीमालकेतु में राजत,कोटि रतन ज्योति॥

जय अम्बे गौरी

श्री अम्बेजी की आरती,जो को‌ई नर गावै।

कहत शिवानन्द स्वामी,सुख सम्पत्ति पावै॥

जय अम्बे गौरी

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