कुमारतन्त्र | Kumar Tantra PDF Hindi

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कुमारतन्त्र | Kumar Tantra Hindi - Description

Dear readers, here we are offering कुमारतन्त्र | Kumar Tantra PDF to all of you. The name of this book is Kumar Tantra and you can find information related to the medical treatment of the child in this book. Children are loved by all and everyone wishes for child happiness. The house where children’s cries echo is no less than heaven, but if small children in the house are sick, then not only do they suffer, but other members of the house also get upset along with them. According to this book, there are 12 different matrikas that influence the child. Due to these mothers, the child suffers for 12 years. Let us know which mothers are these and how they disturb the child. The child’s parents are worried and do various types of treatment, but still can’t find a solution. On the other hand, according to Pt. Sudarshan Sharma Shastri, there is an ancient book on this subject, which was composed by Lankapati Ravana. Although it is not a special thing for children to get sick, getting sick only after a certain interval is definitely a matter of concern. The small child sometimes cries, screams, and falls ill for no reason at certain intervals at certain times. Everything looks simple in medical science.

कुमारतन्त्र | Kumar Tantra PDF in Hindi




1. नंदना मातृका नंदना मातृका शिशु को प्रथम दिन, प्रथम माह या प्रथम वर्ष में पीड़ित करती है। इसके प्रभाव से बालक माता का दूध नहीं पीता और निरंतर रोता रहता है।
2. सुनंदना मातृका जन्म के दूसरे दिन, दूसरे माह, दूसरे वर्ष सुनंदना मातृका पीड़ित करती है, जिससे बालक सोता नहीं हैं, शरीर में कंपन होता है और वह दूध नहीं पीता।
3. पूतना मातृका जन्म के तीसरे दिन, तीसरे माह, तीसरे वर्ष में बालक को पीड़ा देती है। इसके प्रभाव से बालक ऊपर की ओर टकटकी लगाकर देखता हैं मुट्ठियां बांधकर चिल्लाता है।
4. मुखमुंडिका मातृका ये मातृका के तहत संतान जन्म के चौथे दिन, चौथे माह, चौथे वर्ष में बालक गर्दन झुकाए रहता है ज्वर आदि से पीड़ित रहती है।
5. कंठपूतना मातृका जन्म से पांचवे दिन, पांचवे माह तथा पांचवे वर्ष में ये पीड़ा देती है इससे बालक ज्वर से पिड़ित होकर कांपने लगता है और उसकी मुट्ठिया बंधी रहती हैं।
6. शकुनिका मातृका जन्म से छठवें दिन, छठवें माह तथा छठवें वर्ष में पीड़ा देती है। बालक ज्वर से पीड़ित होता है, उसे नींद नहीं आती और ऊपर देखता है।
7. शुष्करेवती मातृका यह जन्म के सातवें दिन, सातवें माह और सातवें वर्ष ये पीड़ा देती है। बालक को बुखार, शरीर में कंपन और निरंत रोना चलता है।
8. अर्यका मातृका जन्म से आठवें दिन, आठवें माह, आठवें वर्ष में ये पीड़ा देती हैं। इससे बालक भोजन नहीं करता, शरीर में दुर्गध आती हैं ज्वर से पीड़ित होता है।
9. भूसूतिका मातृका जन्म से नौवे में दिन, नौवे माह, नौवे वर्ष में पीड़ा देती है। इसके प्रभाव से बालक को बुखार ठंड अधिक लगती है और शरीर दर्द करता है।
10. निऋता मातृका जन्म से दसवें दिन, दसवें माह, दसवें वर्ष में पीड़ा देती हैं। बालक मल मूत्र से जुड़े दोष से पीड़ित रहता है, शरीर में कंपन होता है।
11. पिलिपिच्छिका मातृका यह जन्म से ग्यारहवें दिन, ग्यारहवें माह, ग्यारहवें वर्ष में परेशान करती है, बालक भोजन नहीं करता।
12. कामृका मातृका जन्म से बारहवें दिन, बारहवें माह, बारहवें वर्ष में पीड़ा देता है, बालक हंस हंसकर रोता है हाथ पैर फेंकता हैं खाना नहीं खाता है।

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