श्री काली चालीसा | Kali Chalisa PDF in Hindi

श्री काली चालीसा | Kali Chalisa Hindi PDF Download

श्री काली चालीसा | Kali Chalisa in Hindi PDF download link is given at the bottom of this article. You can direct download PDF of श्री काली चालीसा | Kali Chalisa in Hindi for free using the download button.

Tags:

श्री काली चालीसा | Kali Chalisa Hindi PDF Summary

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप श्री काली चालीसा PDF / Kali Chalisa PDF in Hindi भाषा में प्राप्त कर सकते हैं। माता काली को हिन्दू धर्म में प्रमुखता से पूजा जाता है। माता काली देवी माँ का एक रौद्र रूप हैं। वैसे तो बहुत से लोग माता के इस रूप को देखकर कर भयभीत हो जाते हैं किन्तु उन्हें यह ज्ञात होना चाहिए कि माता का प्रत्येक रूप उनके भक्तों के लिए कल्याणकारी ही होता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार रक्तबीज नामक राक्षस था जिसने ब्रह्मा जी की कठिन तपस्या कर उनसे यह वरदान प्राप्त कर लिया था कि जब भी उसके शरीर से एक भी रक्त की बूंद पृथ्वी पर टपकेगी वहीं पर एक और रक्तबीज का रूप उत्पन्न हो जाएगा। अतः वरदान प्राप्त होने के पश्चात वह अत्यधिक बलशाली और अभिमानी हो गया तथा उसने समस्त लोकों में हाहाकार मचाना आरंभ कर दिया।
उस राक्षस से मुक्ति हेतु सभी ने माता से प्रार्थना की जिसके फलस्वरूप माता ने महाकाली का भीषण रूप धारण किया तथा रक्तबीज के समस्त रूपों का वध करते हुये उसका रक्त भूमि पर स्पर्श होने पूर्व ही खप्पर में एकत्रित कर उसका पान करने लगीं, ऐसा करने पर आँय रक्तबीज उत्पन्न नहीं हो सके और उसका अन्त गया।
अन्त में माता के क्रोध को शांत करने हेतु स्वयं महादेव भोलेनाथ को आना पढ़ा। माहदेव माता काली के मार्ग में लेट गए और माता ने क्रोध के आवेश में भूलवश अपना चरण शिव शंभू के ऊपर रख दिया। जैसे ही माता काली को इसका आभास हुआ उनकी जीव्हा मुख से बाहर आ गयी। माता के इसी रूप को प्रसन्न करने के लिए श्री माँ काली चालीसा pdf यहाँ प्रदान की गयी है।

श्री काली चालीसा PDF / Kali Chalisa in Hindi PDF

॥ दोहा ॥

जय काली जगदम्ब जय,हरनि ओघ अघ पुंज।

वास करहु निज दास के,निशदिन हृदय निकुंज॥

जयति कपाली कालिका,कंकाली सुख दानि।

कृपा करहु वरदायिनी,निज सेवक अनुमानि॥

॥ चौपाई ॥

जय जय जय काली कंकाली।जय कपालिनी, जयति कराली॥

शंकर प्रिया, अपर्णा, अम्बा।जय कपर्दिनी, जय जगदम्बा॥

आर्या, हला, अम्बिका, माया।कात्यायनी उमा जगजाया॥

गिरिजा गौरी दुर्गा चण्डी।दाक्षाणायिनी शाम्भवी प्रचंडी॥

पार्वती मंगला भवानी।विश्वकारिणी सती मृडानी॥

सर्वमंगला शैल नन्दिनी।हेमवती तुम जगत वन्दिनी॥

ब्रह्मचारिणी कालरात्रि जय।महारात्रि जय मोहरात्रि जय॥

तुम त्रिमूर्ति रोहिणी कालिका।कूष्माण्डा कार्तिका चण्डिका॥

तारा भुवनेश्वरी अनन्या।तुम्हीं छिन्नमस्ता शुचिधन्या॥

धूमावती षोडशी माता।बगला मातंगी विख्याता॥

तुम भैरवी मातु तुम कमला।रक्तदन्तिका कीरति अमला॥

शाकम्भरी कौशिकी भीमा।महातमा अग जग की सीमा॥

चन्द्रघण्टिका तुम सावित्री।ब्रह्मवादिनी मां गायत्री॥

रूद्राणी तुम कृष्ण पिंगला।अग्निज्वाला तुम सर्वमंगला॥

मेघस्वना तपस्विनि योगिनी।सहस्त्राक्षि तुम अगजग भोगिनी॥

जलोदरी सरस्वती डाकिनी।त्रिदशेश्वरी अजेय लाकिनी॥

पुष्टि तुष्टि धृति स्मृति शिव दूती।कामाक्षी लज्जा आहूती॥

महोदरी कामाक्षि हारिणी।विनायकी श्रुति महा शाकिनी॥

अजा कर्ममोही ब्रह्माणी।धात्री वाराही शर्वाणी॥

स्कन्द मातु तुम सिंह वाहिनी।मातु सुभद्रा रहहु दाहिनी॥

नाम रूप गुण अमित तुम्हारे।शेष शारदा बरणत हारे॥

तनु छवि श्यामवर्ण तव माता।नाम कालिका जग विख्याता॥

अष्टादश तब भुजा मनोहर।तिनमहँ अस्त्र विराजत सुन्दर॥

शंख चक्र अरू गदा सुहावन।परिघ भुशण्डी घण्टा पावन॥

शूल बज्र धनुबाण उठाए।निशिचर कुल सब मारि गिराए॥

शुंभ निशुंभ दैत्य संहारे।रक्तबीज के प्राण निकारे॥

चौंसठ योगिनी नाचत संगा।मद्यपान कीन्हैउ रण गंगा॥

कटि किंकिणी मधुर नूपुर धुनि।दैत्यवंश कांपत जेहि सुनि-सुनि॥

कर खप्पर त्रिशूल भयकारी।अहै सदा सन्तन सुखकारी॥

शव आरूढ़ नृत्य तुम साजा।बजत मृदंग भेरी के बाजा॥

रक्त पान अरिदल को कीन्हा।प्राण तजेउ जो तुम्हिं न चीन्हा॥

लपलपाति जिव्हा तव माता।भक्तन सुख दुष्टन दु:ख दाता॥

लसत भाल सेंदुर को टीको।बिखरे केश रूप अति नीको॥

मुंडमाल गल अतिशय सोहत।भुजामल किंकण मनमोहन॥

प्रलय नृत्य तुम करहु भवानी।जगदम्बा कहि वेद बखानी॥

तुम मशान वासिनी कराला।भजत तुरत काटहु भवजाला॥

बावन शक्ति पीठ तव सुन्दर।जहाँ बिराजत विविध रूप धर॥

विन्धवासिनी कहूँ बड़ाई।कहँ कालिका रूप सुहाई॥

शाकम्भरी बनी कहँ ज्वाला।महिषासुर मर्दिनी कराला॥

कामाख्या तव नाम मनोहर।पुजवहिं मनोकामना द्रुततर॥

चंड मुंड वध छिन महं करेउ।देवन के उर आनन्द भरेउ॥

सर्व व्यापिनी तुम माँ तारा।अरिदल दलन लेहु अवतारा॥

खलबल मचत सुनत हुँकारी।अगजग व्यापक देह तुम्हारी॥

तुम विराट रूपा गुणखानी।विश्व स्वरूपा तुम महारानी॥

उत्पत्ति स्थिति लय तुम्हरे कारण।करहु दास के दोष निवारण॥

माँ उर वास करहू तुम अंबा।सदा दीन जन की अवलंबा॥

तुम्हारो ध्यान धरै जो कोई।ता कहँ भीति कतहुँ नहिं होई॥

विश्वरूप तुम आदि भवानी।महिमा वेद पुराण बखानी॥

अति अपार तव नाम प्रभावा।जपत न रहन रंच दु:ख दावा॥

महाकालिका जय कल्याणी।जयति सदा सेवक सुखदानी॥

तुम अनन्त औदार्य विभूषण।कीजिए कृपा क्षमिये सब दूषण॥

दास जानि निज दया दिखावहु।सुत अनुमानित सहित अपनावहु॥

जननी तुम सेवक प्रति पाली।करहु कृपा सब विधि माँ काली॥

पाठ करै चालीसा जोई।तापर कृपा तुम्हारी होई॥

॥ दोहा ॥

जय तारा, जय दक्षिणा,कलावती सुखमूल।

शरणागत ‘भक्त ‘ है,रहहु सदा अनुकूल॥

श्री काली माता की आरती / Shri Kali Mata Aarti Lyrics PDF

अम्बे तू है जगदम्बे काली,जय दुर्गे खप्पर वाली,

तेरे ही गुण गावें भारती,ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।

ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

तेरे भक्त जनो पर माताभीर पड़ी है भारी।

दानव दल पर टूट पड़ो माँकरके सिंह सवारी॥

सौ-सौ सिहों से बलशाली,है अष्ट भुजाओं वाली,

दुष्टों को तू ही ललकारती।

ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

माँ-बेटे का है इस जग मेंबड़ा ही निर्मल नाता।

पूत-कपूत सुने हैपर ना माता सुनी कुमाता॥

सब पे करूणा दर्शाने वाली,अमृत बरसाने वाली,

दुखियों के दुखड़े निवारती।

ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

नहीं मांगते धन और दौलत,न चांदी न सोना।

हम तो मांगें तेरे चरणों मेंछोटा सा कोना॥

सबकी बिगड़ी बनाने वाली,लाज बचाने वाली,

सतियों के सत को संवारती।

ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

चरण शरण में खड़े तुम्हारी,ले पूजा की थाली।

वरद हस्त सर पर रख दो माँसंकट हरने वाली॥

माँ भर दो भक्ति रस प्याली,अष्ट भुजाओं वाली,

भक्तों के कारज तू ही सारती।

ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

श्री काली कवच / Shri Kali Kavach PDF

ऊँ क्लीं मे हृदयम् पातु पादौ श्रीकालरात्रि।

ललाटे सततम् पातु तुष्टग्रह निवारिणी॥

रसनाम् पातु कौमारी, भैरवी चक्षुषोर्भम।

कटौ पृष्ठे महेशानी, कर्णोशङ्करभामिनी॥

वर्जितानी तु स्थानाभि यानि च कवचेन हि।

तानि सर्वाणि मे देवीसततंपातु स्तम्भिनी॥

श्री काली स्तोत्र / Shri Kali Stotra PDF

हीं कालरात्रि श्रीं कराली च क्लीं कल्याणी कलावती।

कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता॥

कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी।

कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी॥

क्लीं ह्रीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी।

कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा॥

You can download Kali Chalisa PDF in Hindi by clicking on the following download button.

श्री काली चालीसा | Kali Chalisa pdf

श्री काली चालीसा | Kali Chalisa PDF Download Link

REPORT THISIf the download link of श्री काली चालीसा | Kali Chalisa PDF is not working or you feel any other problem with it, please Leave a Comment / Feedback. If श्री काली चालीसा | Kali Chalisa is a copyright material Report This. We will not be providing its PDF or any source for downloading at any cost.

RELATED PDF FILES

Leave a Reply

Your email address will not be published.