कालाष्टमी व्रत कथा पूजा विधि | Kalashtami Vrat Katha & Pooja Vidhi PDF in Hindi

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कालाष्टमी व्रत कथा पूजा विधि | Kalashtami Vrat Katha & Pooja Vidhi in Hindi

प्यारे भक्तो आज हम आपके लिए लेकर आये हैं Kalashtami Vrat Katha Hindi PDF Pooja Vidhi / कालाष्टमी व्रत कथा पीडीऍफ़ पूजा विधि और महत्त्व बो भी हिंदी भाषा में हिंदू धर्म के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। कल यानी वृहस्पति, 1 जुलाई को कालाष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन विशेष रूप से भोलेबाब के रौद्र रूप काल भैरव के पूजन का दिन होता है। माना जाता है कि अपने आसपास की नकारात्मक शक्तियों को खत्म करने के लिए भक्त इस दिन व्रत रखते हैं। यहाँ से आप बड़ी आसानी से Kalashtami Vrat Katha Hindi PDF Pooja Vidhi / कालाष्टमी व्रत कथा पीडीऍफ़ डाउनलोड कर सकते हैं बो भी सिर्फ एक क्लिक में।

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने पापियों का विनाश करने के लिए अपना रौद्र रूप धारण किया था। बात अगर पौराणिक मान्यताओं की करें तो भगवान शिव के दो रूप बताए जाते हैं, बटुक भैरव और काल भैरव।

कालाष्टमी व्रत कथा | Kalashtami Vrat Katha Hindi PDF

पौराणिक कथा के अनुसार, कहा जाता है कि एकबार एक बार भगवान विष्णु जी और ब्रह्मा जी के बीच यह बहस हो गयी कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है। यह विवाद इतना बढ़ गया कि सभी देवतागण घबरा गए कि अब प्रलय होने वाला है। इस विकट समस्या का समाधान पाने के लिए सभी देवगण भगवान शिव के पास पहुंचे। तब भगवान शिव ने एक सभा का आयोजन किया और भगवान शिव ने इस सभा में सभी ज्ञानी, ऋषि-मुनि, सिद्ध महात्माओं को आमंत्रित किया। इसके साथ ही साथ ही इस सभा में विष्णु जी और ब्रह्मा जी सम्मिलित हुए।

सभा में लिए गए निर्णय को भगवान विष्णु जी ने सहर्ष स्वीकार कर लिया, लेकिन ब्रह्मा जी फैसले से संतुष्ट नहीं हुए और वे महादेव का अपमान करने लगे। ब्रह्माजी ने भगवान शिव की निंदा की जिसके चलते भगवान शिव क्रोधित हो गए। तब भोलेनाथ ने अपने रौद्र रूप से काल भैरव को अवतरित किया। काल भैरव ने भगवान के अपमान का बदला लेने के लिए अपने नाखून से ब्रह्माजी के उस सिर को काट दिया जिससे उन्होंने भगवान शिव की निंदा की थी। इस कारण से उन पर ब्रह्रा हत्या का पाप लग गया।

ब्रह्रा हत्या के पाप से मुक्ति के लिए भगवान शंकर ने काल भैरव को पृथ्वी पर जाकर प्रायश्चित करने को कहा और बताया कि जब ब्रह्रमा जी का कटा हुआ सिर हाथ से गिर जाएगा तब जाकर तुम्हें ब्रह्रा हत्या के पाप से मुक्ति मिल जाएगी। अंत में जाकर काशी में काल भैरव की यात्रा समाप्त हुई थी। फिर यहीं पर वे स्थापित हो गए और काशी के कोतवाल बन गए।

कालाष्टमी का महत्व

कालाष्टमी की महानता ‘आदित्य पुराण’ में वर्णित है। कालाष्टमी पर पूजा के मुख्य देवता भगवान काल भैरव हैं जिन्हें भगवान शिव का एक रूप माना जाता है।

हिंदी में ‘काल’ शब्द का अर्थ ‘समय’ है जबकि ‘भैरव’ का अर्थ ‘शिव की अभिव्यक्ति’ है। इसलिए काल भैरव को ‘समय का देवता’ भी कहा जाता है और भगवान शिव के अनुयायी पूरी भक्ति के साथ उनकी पूजा करते हैं।

हिंदू किंवदंतियों के अनुसार, एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश के बीच एक तर्क के दौरान, भगवान शिव ब्रह्मा द्वारा पारित एक टिप्पणी से क्रोधित हो गए। फिर उन्होंने ‘महाकालेश्वर’ का रूप धारण किया और भगवान ब्रह्मा का 5वां सिर काट दिया।

तब से, देवता और मनुष्य भगवान शिव के इस रूप को ‘काल भैरव’ के रूप में पूजते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो लोग कालाष्टमी के दिन भगवान शिव की पूजा करते हैं, उन्हें भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

यह भी एक लोकप्रिय मान्यता है कि इस दिन भगवान भैरव की पूजा करने से किसी के जीवन से सभी कष्ट, दर्द और नकारात्मक प्रभाव दूर हो जाते हैं।

कालाष्टमी व्रत पूजा विधि

कालाष्टमी व्रत की पूजा रात में की जाती है। भैरव जी की पूजा कर उन्हें जल अर्पित किया जाता है। भैरव कथा का पाठ करना चाहिए. साथ ही भगवान शिव-पार्वती जी की पूजा की जाती है।

कालाष्टमी व्रत अष्टमी तिथि के उदय के साथ ही शुरू हो जाता है और इसका समापन इसके समाप्त होने के साथ होता है। भगवान भैरव की पूजा विधि-विधान से की जाती है। इसके बाद काल भैरव को उनकी प्रिय चीज समर्पित की जाती है। बाद में उनकी आरती और चालीसा का पाठ करकर व्रत का समापन किया जाता है।

कालाष्टमी व्रत में भूलकर भी  कारें ये काम

  • काल भैरव की जयंती, कालाष्टमी के दिन भक्त को झूठ नहीं बोलना चाहिए. इससे भक्त को नुक्सान हो सकता है.
  • कालाष्टमी व्रत के दिन अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए. इस दिन केवल फलाहार ही करना चाहिए.
  • कालाष्टमी व्रत को नमक भी नहीं खाना चाहिए. शरीर में नमक की कमी महसूस हो तो काला नमक का सेवन करना चाहिए.
  • काल भैरव की पूजा किसी के नाश के लिए नहीं किया जाना चाहिए.
  • गृहस्थ जीवन में भगवान भैरव की तामसिक पूजा नहीं करनी चाहिए. बल्कि बटुक भैरव की पूजा करनी चाहिए. इनकी पूजा सौम्य मानी जाती है

कालाष्टमी व्रत का महत्व

कालभैरव की पूजा अर्चना करने से शत्रु और सभी पापों का नाश होता है। साथ ही मनोकामनाएं पूरी होती है। अगर कोई ग्रह अशुभ प्रभाव दे रहा है, तो कालभैरव का व्रत करने से राहत मिलती है। इनकी पूजा करने से जादू-टोना खत्म हो जाता है। साथ ही भूत-प्रेत से मुक्ति मिलती है और भय आदि समाप्त हो जाता है।

काल भैरव मंत्र

ॐ हं षं नं गं कं सं खं महाकाल भैरवाय नम:

– ऊँ अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्.

भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि..

2- माता महाकाली मंत्र

3- श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीयै हूं हूं फट स्वाहा:”कता बढ़ती है

कालाष्टमी पर इन कामों से बचें

कालाष्टमी का दिन बहुत खास होता है इसलिए इस अवसर पर आपके द्वारा किए गए कामों का फल अवश्य मिलता है। इसलिए कालाष्टमी के दिन इन कामों को करने से जरूर बचें।

– अपने दुश्मनों के नाश के लिए कभी भी कालाष्टमी पर पूजा न करें, यह आपके लिए फायदेमंद नहीं होगा।

– कालभैरव के साथ शिव-पार्वती की पूजा जरूर करें।

– कालाष्टमी के दिन नमक नहीं खाएं, अगर आपको कमजोरी होती हो तो सेंधा नमक खाने में इस्तेमाल कर सकते हैं।

– इस दिन कोशिश करके झूठ नहीं बोले, बल्कि हमेशा सच्चाई का साथ देकर सत्य बोलने का प्रयास करें।

– कालाष्टमी के दिन व्रत रहकर फलाहार करें।

– बटुक भैरव की ही पूजा करें इससे आपको फायदा मिलेगा।

– कालाष्टमी के दिन ध्यान दे कर माता-पिता और गुरु का अपमान न करें।

– कालाष्टमी के दिन घर में साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें, गंदगी नहीं करें।

– प्रज्ञा पाण्डेय

कालाष्टमी व्रत के लाभ

  • कालाष्टमी व्रत भक्तों पर महान गुण प्रदान कर सकता है। यहां कालाष्टमी पूजा करने और व्रत का पालन करने के कुछ अद्भुत लाभ हैं।
  • परिवार और पेशेवर जीवन में सभी दौर की सफलता देता है ।
  • मन में भ्रम को दूर करता है और दृष्टि की स्पष्टता को बढ़ाता है। रोग और लाइलाज बीमारियों को दूर किया जाता है।

इस दिन किया गया श्राद्ध महान गुण और स्पष्ट पितृ दोष को प्रदान कर सकता है। सभी पापों को दूर करने और अपार लाभ पाने के लिए, इस दिन किए जाने वाले कुछ प्रसिद्ध पूजाओं में तंत्र पूजा, कालसर्प पूजा, शक्ति पूजा और रक्षा पूजा शामिल हैं।

कालाष्टमी का अनुष्ठान

कालाष्टमी भगवान शिव के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन भक्त सूर्योदय से पहले उठ जाते हैं और जल्दी स्नान करते हैं। वे उनके दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने और अपने पापों के लिए क्षमा मांगने के लिए काल भैरव की विशेष पूजा करते हैं।

भक्त शाम को भगवान काल भैरव के मंदिर में भी जाते हैं और वहां विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि कालाष्टमी भगवान शिव का एक उग्र रूप है। उनका जन्म भगवान ब्रह्मा के जलते हुए क्रोध और क्रोध को समाप्त करने के लिए हुआ था।

कालाष्टमी पर सुबह के समय मृत पूर्वजों की विशेष पूजा और अनुष्ठान भी किया जाता है।

भक्त पूरे दिन कठोर उपवास भी रखते हैं। कुछ कट्टर भक्त पूरी रात जागरण करते हैं और महाकालेश्वर की कथा सुनने में अपना समय व्यतीत करते हैं। कालाष्टमी व्रत का पालन करने वाले को समृद्धि और खुशी का आशीर्वाद मिलता है और वह अपने जीवन में सभी सफलता प्राप्त करता है।

काल भैरव कथा का पाठ करना और भगवान शिव को समर्पित मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है।

कालाष्टमी पर कुत्तों को खाना खिलाने का भी रिवाज है क्योंकि काले कुत्ते को भगवान भैरव का वाहन माना जाता है। कुत्तों को दूध, दही और मिठाई दी जाती है।

काशी जैसे हिंदू तीर्थ स्थानों पर ब्राह्मणों को भोजन देना अत्यधिक फलदायी माना जाता है।

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कालाष्टमी व्रत कथा पूजा विधि | Kalashtami Vrat Katha & Pooja Vidhi pdf

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