जितिया व्रत पूजा विधि | Jitiya Vrat Puja Vidhi PDF in Hindi

जितिया व्रत पूजा विधि | Jitiya Vrat Puja Vidhi Hindi PDF Download

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जितिया व्रत पूजा विधि | Jitiya Vrat Puja Vidhi Hindi PDF Summary

नमस्कार पाठकों, प्रस्तुत लेख के माध्यम से आप जितिया व्रत पूजा विधि PDF / Jitiya Vrat Puja Vidhi PDF Hindi भाषा में निशुल्क प्राप्त कर सकते हैं। मित्रों, जैसा कि आप जानते ही होंगे हिन्दू धर्म में विभिन्न प्रकार के उपवास व व्रतों का पालन किया जाता है, जिसके फलस्वरूप भक्तों को अनेक प्रकार के लाभ होते हैं।

ऐसे ही चमत्कारी व दिव्य व्रतों में से एक जीवित्पुत्रिका व्रत है। जीवित्पुत्रिका व्रत को स्थानीय भाषाओं में भिन्न – भिन्न नामों से जाना जाता है। कुछ लोग इसे जितिया व्रत के नाम से भी जानते हैं। हालांकि, जीवित्पुत्रिका व्रत मुख्य रूप से पश्चिमी उड़ीसा में अत्यधिक बड़े स्तर पर मनाया जाता है, किन्तु अन्य स्थानों पर भी यह व्रत उतना ही लोकप्रिय है।

जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत पूजा विधि PDF / Jivitputrika Vrat (Jitiya) Puja Vidhi PDF

  • स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद भगवान जीमूतवाहन की पूजा करें।
  • इसके लिए कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा को – – – धूप-दीप, चावल, पुष्प आदि अर्पित करें।
  • इस व्रत में मिट्टी और गाय के गोबर से चील व सियारिन की मूर्ति बनाई जाती है।
  • इनके माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाया जाता है।
  • पूजा समाप्त होने के बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनी जाती है।
  • पारण के बाद यथाशक्ति दान और दक्षिणा दें।

जिउतिया व्रत की पौराणिक कथा / Jivitputrika Vrat Katha in Hindi

इस व्रत की कहानी जीमूतवाहन से जुड़ी है। गन्धर्वराज जीमूतवाहन बड़े धर्मात्मा और त्यागी पुरुष थे।इसलिए उन्होंने अपना राज्य आदि छोड़ दिया और वो अपने पिता की सेवा करने के लिए वन में चले गए थे। वन में एक बार उन्हें घूमते हुए नागमाता मिली। नागमाता विवाप कर रही थी, जब जीमूतवाहन ने उनके विलाप करने का कारण पूछा, तो उन्होंने बताया कि नागवंश गरुड़ से काफी परेशान है, वंश की रक्षा करने के लिए वंश ने गरुड़ से समझौता किया है।

समझौते के अनुसार वे प्रतिदिन उसे एक नाग खाने के लिए देंगे और बदले में वो हमारा सामूहिक शिकार नहीं करेगा। उन्होंने आगे बताया कि इस प्रक्रिया में आज उसके पुत्र को गरुड़ के सामने जाना है। नागमाता की पूरी बात सुनकर जीमूतवाहन ने उन्हें वचन दिया कि वे उनके पुत्र को कुछ नहीं होने देंगे। उसकी जगह कपड़े में लिपटकर खुद गरुड़ के सामने उस शिला पर लेट जाएंगे, जहां से गरुड़ अपना आहार उठाता है और उन्होंने ऐसा ही किया।

गरुड़ ने जीमूतवाहन को अपने पंजों में दबाकर पहाड़ की तरफ उड़ गया। जब गरुड़ ने देखा कि हमेशा की तरह नाग चिल्ला नहीं रहा है और उसकी कोई आवाज नहीं आ रही है। गरुड़ ने कपड़ा हटाया, ऐसे में उसने जीमूतवाहन को सामने पाया। जीमूतवाहन ने सारी कहानी गरुड़ को बता दी, जिसके बाद उसने जीमूतवाहन को छोड़ दिया और नागों को ना खाने का भी वचन दिया।

जितिया व्रत की आरती – Jitiya Vrat Aarti Lyrics in Hindi

ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।

त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥

ओम जय कश्यप…

सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।

दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥

ओम जय कश्यप…

सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।

अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥

ओम जय कश्यप…

सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।

विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥

ओम जय कश्यप…

कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।

सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥

ओम जय कश्यप…

नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।

वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥

ओम जय कश्यप…

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