गायत्री कवच | Gayatri Kavacham PDF in Hindi

Download गायत्री कवच | Gayatri Kavacham PDF in Hindi

गायत्री कवच | Gayatri Kavacham PDF download link is given at the bottom of this article. You can direct download PDF of गायत्री कवच | Gayatri Kavacham in Hindi for free using the download button.

गायत्री कवच | Gayatri Kavacham Hindi PDF Summary

दोस्तों आज हम आपके लिए लेकर आये हैं गायत्री कवच PDF / Gayatri Kavacham PDF in Hindi जिसमे आपको गायत्री माँ के सरे मंत्र पढ़ने को मिलेंगी। हिंदू धर्म में मां गायत्री को वेदमाता कहा जाता है अर्थात सभी वेदों की उत्पत्ति इन्हीं से हुई है। गायत्री को भारतीय संस्कृति की जननी भी कहा जाता है। ब्रह्मा जी कहते हैं कि यह गायत्री कवच सर्वपावन है, पुण्य का दाता, पापों का नाशक पवित्र व समस्त रोगों का निवारण करने वाला है। इसके केवल जप मात्र से सभी यज्ञों के समान फल प्राप्त होता है तथा चतुर्विध पुरुषार्थ की उपलब्धि होती है। यहाँ से आप गायत्री कवचम् PDF | Gayatri Kavacham in Hindi PDF बड़ी आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।

जो साधक तीनों संध्याओं में इस कवच का पाठ करता है| उसकी समस्त कामनायें पूर्ण होती हैं| वह सभी शास्त्रों का तत्त्व समझ लेता है। जिस कारण वे देवताओं में भी उत्तम हो जाता है।

गायत्री कवच PDF | Gayatri Kavacham PDF in Hindi


॥ श्री गायत्री कवचम् ॥
ओं अस्य श्रीगायत्रीकवचस्य, ब्रह्मा ऋषिः, गायत्री छन्दः, गायत्री देवता, भूः बीजम्, भुवः शक्तिः, स्वः कीलकं, गायत्री प्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ।

ध्यानम् –
पञ्चवक्त्रां दशभुजां सूर्यकोटिसमप्रभाम् ।
सावित्रीं ब्रह्मवरदां चन्द्रकोटिसुशीतलाम् ॥ १ ॥

त्रिनेत्रां सितवक्त्रां च मुक्ताहारविराजिताम् ।
वराभयाङ्कुशकशाहेमपात्राक्षमालिकाम् ॥ २ ॥

शङ्खचक्राब्जयुगलं कराभ्यां दधतीं वराम् ।
सितपङ्कजसंस्थां च हंसारूढां सुखस्मिताम् ॥ ३ ॥

ध्यात्वैवं मानसाम्भोजे गायत्रीकवचं जपेत् ॥ ४ ॥

ओं ब्रह्मोवाच ।
विश्वामित्र महाप्राज्ञ गायत्रीकवचं शृणु ।
यस्य विज्ञानमात्रेण त्रैलोक्यं वशयेत् क्षणात् ॥ ५ ॥

सावित्री मे शिरः पातु शिखायां अमृतेश्वरी ।
ललाटं ब्रह्मदैवत्या भ्रुवौ मे पातु वैष्णवी ॥ ६ ॥

कर्णौ मे पातु रुद्राणी सूर्या सावित्रिकाऽम्बिका ।
गायत्री वदनं पातु शारदा दशनच्छदौ ॥ ७ ॥

द्विजान् यज्ञप्रिया पातु रसनायां सरस्वती ।
साङ्ख्यायनी नासिकां मे कपोलौ चन्द्रहासिनी ॥ ८ ॥

चिबुकं वेदगर्भा च कण्ठं पात्वघनाशिनी ।
स्तनौ मे पातु इन्द्राणी हृदयं ब्रह्मवादिनी ॥ ९ ॥

उदरं विश्वभोक्त्री च नाभौ पातु सुरप्रिया ।
जघनं नारसिंही च पृष्ठं ब्रह्माण्डधारिणी ॥ १० ॥

पार्श्वौ मे पातु पद्माक्षी गुह्यं गोगोप्त्रिकाऽवतु ।
ऊर्वोरोङ्काररूपा च जान्वोः सन्ध्यात्मिकाऽवतु ॥ ११ ॥

जङ्घयोः पातु अक्षोभ्या गुल्फयोर्ब्रह्मशीर्षका ।
सूर्या पदद्वयं पातु चन्द्रा पादाङ्गुलीषु च ॥ १२ ॥

सर्वाङ्गं वेदजननी पातु मे सर्वदाऽनघा ।
इत्येतत्कवचं ब्रह्मन् गायत्र्याः सर्वपावनम् ॥ १३ ॥

पुण्यं पवित्रं पापघ्नं सर्वरोगनिवारणम् ।
त्रिसन्ध्यं यः पठेद्विद्वान् सर्वान् कामानववाप्नुयात् ॥ १४ ॥

सर्वशास्त्रार्थतत्त्वज्ञः स भवेद्वेदवित्तमः ।
सर्वयज्ञफलं प्राप्य ब्रह्मान्ते समवाप्नुयात् ।
प्राप्नोति जपमात्रेण पुरुषार्थांश्चतुर्विधान् ॥ १५ ॥

इति श्रीविश्वामित्रसंहितोक्तं गायत्रीकवचं ।

गायत्री कवचम् PDF | Gayatri Kavacham in Hindi PDF

नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर के आप गायत्री कवच PDF / Gayatri Kavacham PDF in Hindi मुफ्त में डाउनलोड कर सकते है।

गायत्री कवच | Gayatri Kavacham pdf

गायत्री कवच | Gayatri Kavacham PDF Download Link

REPORT THISIf the download link of गायत्री कवच | Gayatri Kavacham PDF is not working or you feel any other problem with it, please Leave a Comment / Feedback. If गायत्री कवच | Gayatri Kavacham is a copyright material Report This. We will not be providing its PDF or any source for downloading at any cost.

RELATED PDF FILES

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *