गंगा दशहरा व्रत कथा | Ganga Dussehra Ki Katha & Puja Vidhi PDF in Hindi

गंगा दशहरा व्रत कथा | Ganga Dussehra Ki Katha & Puja Vidhi Hindi PDF Download

गंगा दशहरा व्रत कथा | Ganga Dussehra Ki Katha & Puja Vidhi in Hindi PDF download link is given at the bottom of this article. You can direct download PDF of गंगा दशहरा व्रत कथा | Ganga Dussehra Ki Katha & Puja Vidhi in Hindi for free using the download button.

गंगा दशहरा व्रत कथा | Ganga Dussehra Ki Katha & Puja Vidhi Hindi PDF Summary

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप गंगा दशहरा व्रत कथा / Ganga Dussehra Ki Katha PDF प्राप्त कर सकते हैं। गंगा दशहरा के पर्व को हिन्दू वैदिक पंचांग में बहुत अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। हिन्दू धर्म में गंगा नदी को मात्र एक नदी माना जाता बल्कि माता की तरह पूजा जाता है। माता गंगा को सर्वाधिक पवित्र नदी माना जाता है।

पौराणिक कथा में गंगा के स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरने के बारे में विस्तार से बताया गया है । गंगा ऐसे ही पृथ्वी पर अवतरित नहीं हुईं। राजा भगीरथ ने कठोर तप करके मां गंगा को पृथ्वी पर अवतरित होने की प्रार्थना की थी। गंगा दशहरा के दिन दान व तीर्थ स्नान का भी बहुत अधिक महत्व होता है ।

गंगा दशहरा व्रत कथा / Ganga Dussehra Ki Katha PDF

युधिष्ठिर ने लोमश ऋषि से पूछा, “हे मुनिवर! राजा भगीरथ गंगा को किस प्रकार पृथ्वी पर ले आये? कृपया इस प्रसंग को भी सुनायें।” लोमश ऋषि ने कहा, “धर्मराज! इक्ष्वाकु वंश में सगर नामक एक बहुत ही प्रतापी राजा हुये। उनके वैदर्भी और शैव्या नामक दो रानियाँ थीं। राजा सगर ने कैलाश पर्वत पर दोनों रानियों के साथ जाकर शंकर भगवान की घोर आराधना की।

उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने उनसे कहा कि हे राजन्! तुमने पुत्र प्राप्ति की कामना से मेरी आराधना की है। अतएव मैं वरदान देता हूँ कि तुम्हारी एक रानी के साठ हजार पुत्र होंगे किन्तु दूसरी रानी से तुम्हारा वंश चलाने वाला एक ही सन्तान होगा। इतना कहकर शंकर भगवान अन्तर्ध्यान हो गये।

“समय बीतने पर शैव्या ने असमंज नामक एक अत्यन्त रूपवान पुत्र को जन्म दिया और वैदर्भी के गर्भ से एक तुम्बी उत्पन्न हुई जिसे फोड़ने पर साठ हजार पुत्र निकले। कालचक्र बीतता गया और असमंज का अंशुमान नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। असमंज अत्यन्त दुष्ट प्रकृति का था इसलिये राजा सगर ने उसे अपने देश से निष्कासित कर दिया। फिर एक बार राजा सगर ने अश्वमेघ यज्ञ करने की दीक्षा ली। अश्वमेघ यज्ञ का श्यामकर्ण घोड़ा छोड़ दिया गया और उसके पीछे-पीछे राजा सगर के साठ हजार पुत्र अपनी विशाल सेना के साथ चलने लगे।

सगर के इस अश्वमेघ यज्ञ से भयभीत होकर देवराज इन्द्र ने अवसर पाकर उस घोड़े को चुरा लिया और उसे ले जाकर कपिल मुनि के आश्रम में बाँध दिया। उस समय कपिल मुनि ध्यान में लीन थे अतः उन्हें इस बात का पता ही न चला। इधर सगर के साठ हजार पुत्रों ने घोड़े को पृथ्वी के हरेक स्थान पर ढूँढा किन्तु उसका पता न लग सका। वे घोड़े को खोजते हुये पृथ्वी को खोद कर पाताल लोक तक पहुँच गये जहाँ अपने आश्रम में कपिल मुनि तपस्या कर रहे थे और वहीं पर वह घोड़ा बँधा हुआ था। सगर के पुत्रों ने यह समझ कर कि घोड़े को कपिल मुनि ही चुरा लाये हैं, कपिल मुनि को कटुवचन सुनाना आरम्भ कर दिया। अपने निरादर से कुपित होकर कपिल मुनि ने राजा सगर के साठ हजार पुत्रों को अपने क्रोधाग्नि से भस्म कर दिया।

“जब सगर को नारद मुनि के द्वारा अपने साठ हजार पुत्रों के भस्म हो जाने का समाचार मिला तो वे अपने पौत्र अंशुमान को बुलाकर बोले कि बेटा! तुम्हारे साठ हजार दादाओं को मेरे कारण कपिल मुनि की क्रोधाग्नि में भस्म हो जाना पड़ा। अब तुम कपिल मुनि के आश्रम में जाकर उनसे क्षमाप्रार्थना करके उस घोड़े को ले आओ। अंशुमान अपने दादाओं के बनाये हुये रास्ते से चलकर कपिल मुनि के आश्रम में जा पहुँचे। वहाँ पहुँच कर उन्होंने अपनी प्रार्थना एवं मृदु व्यवहार से कपिल मुनि को प्रसन्न कर लिया।

कपिल मुनि ने प्रसन्न होकर उन्हें वर माँगने के लिये कहा। अंशुमान बोले कि मुने! कृपा करके हमारा अश्व लौटा दें और हमारे दादाओं के उद्धार का कोई उपाय बतायें। कपिल मुनि ने घोड़ा लौटाते हुये कहा कि वत्स! जब तुम्हारे दादाओं का उद्धार केवल गंगा के जल से तर्पण करने पर ही हो सकता है।

“अंशुमान ने यज्ञ का अश्व लाकर सगर का अश्वमेघ यज्ञ पूर्ण करा दिया। यज्ञ पूर्ण होने पर राजा सगर अंशुमान को राज्य सौंप कर गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने के उद्देश्य से तपस्या करने के लिये उत्तराखंड चले गये इस प्रकार तपस्या करते-करते उनका स्वर्गवास हो गया। अंशुमान के पुत्र का नाम दिलीप था।

दिलीप के बड़े होने पर अंशुमान भी दिलीप को राज्य सौंप कर गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने के उद्देश्य से तपस्या करने के लिये उत्तराखंड चले गये किन्तु वे भी गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने में सफल न हो सके। दिलीप के पुत्र का नाम भगीरथ था। भगीरथ के बड़े होने पर दिलीप ने भी अपने पूर्वजों का अनुगमन किया किन्तु गंगा को लाने में उन्हें भी असफलता ही हाथ आई।

“अन्ततः भगीरथ की तपस्या से गंगा प्रसन्न हुईं और उनसे वरदान माँगने के लिया कहा। भगीरथ ने हाथ जोड़कर कहा कि माता! मेरे साठ हजार पुरखों के उद्धार हेतु आप पृथ्वी पर अवतरित होने की कृपा करें। इस पर गंगा ने कहा वत्स! मैं तुम्हारी बात मानकर पृथ्वी पर अवश्य आउँगी, किन्तु मेरे वेग को भगवान शिव के अतिरिक्त और कोई सहन नहीं कर सकता।

इसलिये तुम पहले भगवान शिव को प्रसन्न करो। यह सुन कर भगीरथ ने भगवान शिव की घोर तपस्या की और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी हिमालय के शिखर पर गंगा के वेग को रोकने के लिये खड़े हो गये। गंगा जी स्वर्ग से सीधे शिव जी की जटाओं पर जा गिरीं। इसके बाद भगीरथ गंगा जी को अपने पीछे-पीछे अपने पूर्वजों के अस्थियों तक ले आये जिससे उनका उद्धार हो गया। भगीरथ के पूर्वजों का उद्धार करके गंगा जी सागर में जा गिरीं और अगस्त्य मुनि द्वारा सोखे हुये समुद्र में फिर से जल भर गया।”

गंगा दशहरा पूजा विधि / Ganga Dussehra 2022 Pooja Vidhi

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। इस दिन गंगा नदी में स्नान का विशेष महत्व होता है, लेकिन जो लोग गंगा स्नान नहीं कर सकते हैं, इसलिए घर में रहकर ही नहाने के पानी में गंगा जल डालकर मां गंगा का ध्यान कर स्नान करें।
  • घर के मंदिर में गंगा जल का छिड़काव करें और दीप प्रज्वलित करें।
  • इस दिन मां गंगा का अधिक से अधिक ध्यान करें।
  • मां गंगा को भोग लगाएं। इस बात का ध्यान रखें भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है।
  • इस दिन दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। अपनी क्षमता के अनुसार दान जरूर करें।
  • घर में रहकर ही मां गंगा की आरती करें।
  • मां गंगा चालीसा का पाठ करने से भी शुभ फल की प्राप्ति होती है।

माँ गंगा आरती / Ganga Dussehra 2022 Aarti PDF

ॐ जय गंगे माता, श्री गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता।
ॐ जय गंगे माता…

चन्द्र-सी ज्योत तुम्हारी जल निर्मल आता।
शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता।
ॐ जय गंगे माता…

पुत्र सगर के तारे सब जग को ज्ञाता।
कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता।
ॐ जय गंगे माता…

एक ही बार भी जो नर तेरी शरणगति आता।
यम की त्रास मिटा कर, परम गति पाता।
ॐ जय गंगे माता…

आरती मात तुम्हारी जो जन नित्य गाता।
दास वही जो सहज में मुक्ति को पाता।
ॐ जय गंगे माता…
ॐ जय गंगे माता…।।

गंगा अवतरण पूजा समय / Ganga Dussehra Muhurat 2022

गंगा दशहरा बृहस्पतिवार, जून 9, 2022 को
दशमी तिथि प्रारम्भ – जून 09, 2022 को 08:21 ए एम बजे
दशमी तिथि समाप्त – जून 10, 2022 को 07:25 ए एम बजे
हस्त नक्षत्र प्रारम्भ – जून 09, 2022 को 04:31 ए एम बजे
हस्त नक्षत्र समाप्त – जून 10, 2022 को 04:26 ए एम बजे
व्यतीपात योग प्रारम्भ – जून 09, 2022 को 03:27 ए एम बजे
व्यतीपात योग समाप्त – जून 10, 2022 को 01:50 ए एम बजे

मां गंगा की आराधना मंत्र

नमो भगवते दशपापहराये गंगाये नारायण्ये रेवत्ये शिवाये दक्षाये अमृताये विश्वरुपिण्ये नंदिन्ये ते नमो नम:

अर्थ – हे भगवती, दसपाप हरने वाली गंगा, नारायणी, रेवती, शिव, दक्षा, अमृता, विश्वरूपिणी, नंदनी को को मेरा नमन।

You can download Ganga Dussehra Ki Katha PDF by clicking on the following download button.

गंगा दशहरा व्रत कथा | Ganga Dussehra Ki Katha & Puja Vidhi pdf

गंगा दशहरा व्रत कथा | Ganga Dussehra Ki Katha & Puja Vidhi PDF Download Link

REPORT THISIf the download link of गंगा दशहरा व्रत कथा | Ganga Dussehra Ki Katha & Puja Vidhi PDF is not working or you feel any other problem with it, please Leave a Comment / Feedback. If गंगा दशहरा व्रत कथा | Ganga Dussehra Ki Katha & Puja Vidhi is a copyright material Report This. We will not be providing its PDF or any source for downloading at any cost.

RELATED PDF FILES

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *