गणेश गीता / Ganesh Geeta PDF in Hindi

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गणेश गीता / Ganesh Geeta in Hindi

Dear readers, here we are offering you गणेश गीता pdf / Ganesh Geeta in Hindi PDF. You can get the Ganesha Gita pdf download link in this article. Many of us are aware of the Shrimad Bhagwat Geeta but never listen to the Ganesh Gita Hindi pdf. There are 11 Adhyay and 414 Shloka in the Ganesh Geeta PDF. Lord Ganesha recited Ganesha Geeta to King Varenya after finishing a war. It is one of the best scriptures for self-help to go in the right direction. You will get a lot of knowledge and wisdom by reading this Ganesh Geeta PDF. In the first chapter of this Ganesh Gita pdf lord Ganesha has told about the way of peace and in the second chapter he told about the Law of Karma and in the third Lord Ganapati revealed the secret of his incarnation and in the fourth chapter, he educated us about the Yoga & Meditation. If you want to download the गणेश गीता pdf / Ganesh Geeta in Hindi PDF, you can get it through the download link given below in this article.

 

Ganesh Gita PDF / गणेश गीता PDF

 

राजा वरेण्य ने गजानन से प्रार्थना की ….. ‘हे सब शास्त्रों और विद्याओं के ज्ञाता महाबाहु विघ्नेश्वर! आप मेरा अज्ञान दूर कर मुझे मुक्ति के मार्ग का उपदेश कीजिए।’

तब भगवान गजानन ने राजा वरेण्य को योगामृत से भरी ‘श्रीगणेशगीता’ का उपदेश किया। श्रीगणेशगीता को सुनने के बाद राजा वरेण्य विरक्त हो गए और पुत्र को राज्य सौंपकर वन में चले गए। वहां योग का आश्रय लेकर वे मोक्ष को प्राप्त हुए।

 

“यथा जलं जले क्षिप्तं जलमेव हि जायते|

तथा तद्ध्यानत: सोऽपि तन्मयत्वमुपाययौ।।”

जिस प्रकार जल जल में मिलने पर जल ही हो जाता है, उसी प्रकार ब्रह्मरूपी गणेश का चिन्तन करते हुए राजा वरेण्य भी उस ब्रह्मरूप में समा गये।”

वरेण्य उवाच

 

किं सुखं त्रिषु लोकेषु देवगन्धर्वयोनिषु ।

भगवन् कृपया तन्मे वद विद्या विशारद ।।२०।।

अर्थ:- वरेण्य बोले – भगवन् ! तीनों लोकों तथा देवता और गंधर्व आदि योनियों में यथार्थ सुख क्या है ? हे विद्याविशारद ! कृपाकर आप यह मुझसे वर्णन कीजिये ।।

श्रीगजानन उवाच

 

आनन्दमश्नुतेऽसक्तः स्वात्मारामो निजात्मनि ।

अविनाशि सुखं तद्धि न सुखं विषयादिषु ।।२१।।

अर्थ:- श्रीगणेश जी बोले – जो अपनी आत्मा में ही रमण करते हैं और कहीं आसक्त नहीं होते, वे ही आनन्द भोगते हैं, उसीका नाम अविनाशी सुख है, विषयादिकों में (वास्तविक) सुख नहीं ।।

 

विषयोत्थानि सौख्यनि दुःखानां तानि हेतवः ।

उत्पत्तिनाशयुक्तानि तत्रासक्तो न तत्त्ववित् ।।२२।।

अर्थ:- विषयों से उत्पन्न हुए सुख तो दुःख के ही कारण हैं और उत्पत्ति तथा नाशवाले हैं । तत्त्ववित् उनमें आसक्त नहीं होते ।।

 

कारणे सति कामस्य क्रोधस्य सहते च यः ।

तौ जेतुं वर्ष्मविरहात्स सुखं चिरमश्नुते ।।२३।।

अर्थ:- काम, क्रोध आदि का कारण उपस्थित रहने पर भी जो उनके आवेगों को रोक लेता है तथा शरीर के प्रति अनासक्त होकर उन्हें जीतने का प्रयत्न करता है, वह बहुत काल तक सुख भोगता है ।

 

अन्तर्निष्ठोऽन्तःप्रकाशोऽत्न्तःसुखोऽन्तारतिर्लभेत् ।

असन्दिग्धोऽक्षयं ब्रह्म सर्वभूतहितार्थकृत् ।।२४।।

अर्थ:- जिनके हृदय में निष्ठा है, ज्ञान का प्रकाश है, सुख है तथा वैराग्य है, जो सब प्राणियों का हित करता है, वह निश्चय ही अक्षय ब्रह्म को प्राप्त करता है ।

 

जेतारः षड्रिपूणां ये शमिनो दमिनस्तथा ।

तेषां समन्ततो ब्रह्म स्वात्मज्ञानां विभात्यहो ।।२५।।

अर्थ:- जो काम क्रोधादि छहों शत्रुओं को जीत चुके हैं, जो शम और दम का पालन करते हैं, उन आत्मज्ञानियों को सर्वत्र ब्रह्म ही दिखता है ।

 

आसनेषु समासीनसत्यक्त्वेमान् विषयान् बहिः ।

संस्तभ्य भ्रुकुटीमास्ते प्राणायामपरायणः ।।२६।।

अर्थ:- सब बाह्य विषयों को त्यागकर एकान्त में आसन में स्थित हो, दृष्टि को भ्रूमध्यमें स्थिरकर प्राणायाम करें ।

 

प्राणायाममं तु संरोधं प्राणापानसमुद्भवम् ।

वदन्ति मुनयस्तं च त्रिधाभुतं विपश्चितः ।।२७।।

अर्थ:- प्राण और अपान वायुके रोकने को प्राणायाम कहते हैं, बुद्धिमान् ऋषियों ने उसके तीन भेद कहे हैं ।  ( Note :- आप सम्पूर्ण गणेश गीता PDF पढ़ने के लिए नीचे दिए Ganesh Geeta in Hindi PDF free download link पर क्लिक करके प्राप्त कर सकते हैं।)

 

गणेश गीता PDF

प्रिय पाठकों, यहाँ हम आपके लिए गणेश गीता pdf / Ganesh Geeta in Hindi PDF प्रस्तुत कर रहे हैं। यूँ तो आप सभी ने अधिकांशतः श्रीमद भगवत गीता के सन्दर्भ में सुना होगा किन्तु यहाँ हम आपको श्री गणेश गीता के सन्दर्भ में बताने जा रहे हैं। श्री गणेश गीता को स्वयं भगवान् गणेश जी ने वरेण्य नामक राजा को सुनाया था। गणेश गीता pdf में ११ अध्याय तथा ४१४ श्लोक हैं। गणेश गीता pdf के प्रथम अध्याय में भगवान् गणेश जी ने शान्ति के मार्ग के बारे में बताया है, द्वितीय अध्याय में कर्म तथा कर्मचक्र के सन्दर्भ में उपदेश दिया है, तृतीय अध्याय में गणेश जी ने स्वयं के अवतार व उसके रहस्य का प्रादुर्भाव किया है तथा चतुर्थ अध्याय में योग व प्रणायाम सम्बन्धी ज्ञान दिया है। इसी प्रकार गणेश गीता के विभिन्न अध्यायों में भिन्न-भिन्न प्रकार के उपदेश श्री गणेश द्वारा दिए गए हैं। आप नीचे दिए हुए डाउनलोड लिंक पर जाकर निशुल्क श्री गणेश गीता pdf / Ganesh Geeta PDF हिंदी भाषा में डाउनलोड कर सकते हैं तथा इसे प्रिंट भी कर सकते हैं।

 

गणेशगीता के 11 अध्यायों के नाम

  1. गणेशगीता का प्रथम अध्याय सांख्यसारार्थ नामक है। इसमें श्री गणेश ने राजा वरेण्य को शांति का मार्ग बतलाया था।
  2. दूसरा अध्याय कर्मयोग नामक है। इसमें श्री गणेश जी ने राजा वरेण्य को कर्म के मर्म का उपदेश दिया था।
  3. तीसरा अध्याय विज्ञानयोग नामक है। इसमें श्री गणेश ने राजा वरेण्य को अपने अवतार-धारण करने का रहस्य बतलाया था।
  4. वैधसंन्यासयोग नाम के चौथे अध्याय में राजा वरेण्य को योगाभ्यास तथा प्राणायाम से संबंधित कई अहम बातें बतलाई थीं।
  5. योगवृत्तिप्रशंसनयोग नाम के पांचवें अध्याय में योगाभ्यास के अनुकूल-प्रतिकूल देश-काल-पात्र के बारे में राजा वरेण्य को बताया था।
  6. बुद्धियोग नामक छठे अध्याय में श्री गणेश ने राजा वरेण्य को बताया था कि मनुष्य में मुझे यानी ईश्वर को जानने की इच्छा तब उत्पन्न होती है जब किसी सत्कर्म का प्रभाव होता है। जैसा भाव होता है, उसके अनुरूप ही मैं उसकी इच्छा पूर्ण करता हूं। अंत में जो व्यक्ति मेरी इच्छा करता है और मुझमें लीन हो जाता है उनका योग-क्षेम मैं स्वयं वहन करता हूं।
  7. सातवें यानी उपासनायोग नामक अध्यानय में श्री गणेश ने राजा को भक्तियोग का वर्णन किया है।
  8. विश्वरूपदर्शनयोग नाम के आठवें अध्याय में श्री गणेश ने राजा को अपने विराट रूप का दर्शन कराया था।
  9. श्री गणेश ने नौवें अध्याय में राजा वरेण्य को क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ का ज्ञान तथा सत्व, रज, तम-तीनों गुणों का परिचय दिया है।
  10. गणेशगीता का दसवां अध्याय उपदेशयोग नामक है। इसमें दैवी, आसुरी और राक्षसी-तीनों प्रकार की प्रकृतियों के बारे में राजा वरेण्य को श्री गणेश ने बतलाया है। इसमें बप्पा ने काम, क्रोध, लोभ और दंभ के बारे में बतलाया है।
  11. इसका अंतिम अध्याय त्रिविधवस्तुविवेक-निरूपणयोग नामक है। इसमें राजा को गणेश जी ने कायिक, वाचिक तथा मानसिक भेद से तप के प्रकारों के बारे में बताया है।

 

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गणेश गीता / Ganesh Geeta pdf

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