गीता प्रेस गोरखपुर दुर्गा सप्तशती | Durga Saptashati Gita Press Gorakhpur PDF

गीता प्रेस गोरखपुर दुर्गा सप्तशती | Durga Saptashati Gita Press Gorakhpur PDF Download

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गीता प्रेस गोरखपुर दुर्गा सप्तशती | Durga Saptashati Gita Press Gorakhpur PDF Summary

दोस्तों आज हम आपके लिए लेकर आएं हैं Durga Saptashati Gita Press Gorakhpur Hindi PDF / गीता प्रेस गोरखपुर दुर्गा सप्तशती हिंदी पीडीएफ जिसमे आपको माँ दुर्गा आरती पीडीएफ, दुर्गा पूजा विधि, आदि चीज़े पढ़ने को मिलेंगी। दुर्गासप्तशती पाठ सात सौ श्लोकों को एकत्रित करके बनाया गया एक देवी उपासना ग्रंथ है जिसके रोजाना पाठ करने से माँ दुर्गा आपके सारे दुखों को दूर करके उनके जीवन को सुख और समृद्धि से भर देती है। यह सप्तशती पाठ माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए उनके भगतों द्वारा किया जाता है। इस पोस्ट में हमने आपके लिए Durga Saptashati Gita Press Gorakhpur Hindi PDF / गीता प्रेस गोरखपुर दुर्गा सप्तशती Hindi PDF डाउनलोड करने के लिए डायरेक्ट लिंक भी दिया हैं।

दुर्गा सप्ताशी के दिन दुर्गा सप्तशती कवच का नियमित रूप से पाठ करना बहुत लाभदायी होता है। इसी तरह अष्टमी वाले दिन दुर्गा अष्टमी व्रत कथा को सुनना चाहिए। नवमी नवरात्रि का अंतिम दिन होता है इस दिन महानवमी व्रत कथा सुनकर कन्याओं(कंजकों) का पूजन कर के उनका भोग लगा कर ही व्रत को खोलना चाहिए। माँ दुर्गा को प्रशन्न करने के लिए भक्तजन विधि-विधान से दुर्गा माता का हवन भी कर सकते है। दुर्गा चालीसा का पाठ श्रद्धापूर्वक करने से करने से माता रानी बहुत प्रशन्न होती हैं।भक्त्जाओ को नौ दिन माता के भजन सुनकर और सुनाकर आनंदित रहना चाहिए। माँ दुर्गा के 108 नाम लेकर उनका ध्यान करना चाहिए और हमेशा उनका मनन करते रहना चाहिए।

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मार्कंडेय पुराण में इसी देवी चंडी का माहात्म्य बताया है। उसमें देवी के विविध रूपों एवं पराक्रमों का विस्तार से वर्णन किया गया है। इसमें से सात सौ श्लोक एकत्रित कर देवी उपासना के लिए ‘श्री दुर्गासप्तशती’ नामक ग्रंथ बनाया गया है। सुख, लाभ, जय इत्यादि कामनाओं की पूर्ति के लिए सप्तशती पाठ करने का महत्त्व बताया गया है।

शारदीय नवरात्रि में श्री दुर्गासप्तशती पाठ विशेष रूप से करते हैं। कुछ घरों में पाठ करने की कुलपरंपरा ही है। पाठ करनेके उपरांत हवन भी किया जाता है । इस पूरे विधान को ‘चंडी विधान’ कहते हैं। संख्या के अनुसार नवचंडी, शतचंडी, सहस्रचंडी, लक्षचंडी ऐसे चंडी विधान बताए गए हैं। प्राय: लोग नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन एक-एक पाठ करते हैं।

नवरात्रि में यथाशक्ति श्री दुर्गासप्तशती पाठ करते हैं। पाठ के उपरांत पोथी पर फूल अर्पित करते हैं। उसके उपरांत पोथी की आरती करते हैं।

श्री दुर्गासप्तशती पाठ में देवी मां के विविध रूपों को वंदन किया गया है।

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