दुर्गा जी की आरती हिंदी अंबे गौरी PDF

दुर्गा जी की आरती हिंदी अंबे गौरी PDF Download

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दुर्गा जी की आरती हिंदी अंबे गौरी PDF Summary

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप दुर्गा जी की आरती हिंदी अंबे गौरी PDF प्राप्त कर सकते हैं । दुर्गा माता को हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। दुर्गा माता ने अनेकों बार अपने भक्तों तथा देवी – देवताओं की विभिन्न प्रकार के संकटों से रक्षा करती हैं । यदि आप चारों ओर से संकटों से घिरे हैं तो आपको भी दुर्गा माता का पूजन अवश्य करना चाहिए।

माता के भक्तजनों को दुर्गा चालीसा का पाठ नियमित रूप से करना चाहिए और नवरात्रि के नौ दिन माता के भजन सुनकर और सुनाकर आनंदित रहना चाहिए। माँ दुर्गा के 108 नाम लेकर उनका ध्यान करना चाहिए। दुर्गा सप्ताशी के दिन दुर्गा सप्तशती कवच का पाठ करने से बहुत लाभ मिलता है इसी तरह अष्टमी वाले दिन दुर्गा अष्टमी व्रत कथा को सुनना चाहिए।नवमी नवरात्रि का अंतिम दिन होता है इस दिन महानवमी व्रत कथा सुनकर कन्याओं(कंजकों) को पूजकर उनका भोग लगा कर ही व्रत को पूर्ण करना चाहिए। भक्तजन अपनी इच्छा अनुसार विधि-विधान से दुर्गा माता का हवन भी कर सकते है। इन सभी प्रयत्नों के माध्यम से आप माँ दुर्गा को प्रशन्न कर पाएंगे और माता आपको हमेशा सुख-संपत्ति से परिपूर्ण रहने का आशीर्वाद देंगी।

यूं तो आप कभी भी दुर्गा माता का पूजन कर सकते हैं लेकिन नवरात्रि के समय इस पूजन का प्रभाव अत्यंत तीव्र व प्रभावशाली होता है । दुर्गा माता न केवल अपने भक्तों के शत्रुओं नाश करती हैं बल्कि उसके व उसके कुटुंब की भी रक्षा करती हैं । यदि आप भी दुर्गा माता की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो आप नवरात्रि में देवी माँ का पूजन अवश्य करें।

दुर्गा जी की आरती हिंदी अंबे गौरी PDF

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत, मैया जी को सदा मनावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ।।
ॐ जय अम्बे गौरी ।

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना, निर्मल से दोउ नैना, चन्द्रबदन नीको ।।
ॐ जय अम्बे गौरी ।

कनक समान कलेवर,,रक्ताम्बर राजै ।
रक्त पुष्प गलमाला, लाल कुसुम गलमाला, कण्ठन पर साजै ।।
ॐ जय अम्बे गौरी ।

केहरि वाहन राजत, खड़ग खप्परधारी ।
सुर नर मुनिजन सेवत, सुर नर मुनिजन ध्यावत, तिनके दुखहारी ।।
ॐ जय अम्बे गौरी ।

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति ।।
ॐ जय अम्बे गौरी ।

शुम्भ निशुम्भ विडारे, महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना, मधुर विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ।।
ॐ जय अम्बे गौरी ।

चण्ड मुण्ड संघारे, शोणित बीज हरे ।
मधुकैटभ दोउ मारे, मधुकैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ।।
ॐ जय अम्बे गौरी ।

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी ।
आगम निगम बखानी, चारों वेद बखानी, तुम शिव पटरानी ।।
ॐ जय अम्बे गौरी ।

चौसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरू ।
बाजत ताल मृदंगा, बाजत ढोल मृदंगा, अरु बाजत डमरू ।।
ॐ जय अम्बे गौरी ।

तुम हो जग की माता, तुम ही हो भर्ता ।
भक्तन की दुख हरता, संतन की दुख हरता, सुख-सम्पत्ति करता ।।
ॐ जय अम्बे गौरी ।

भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी ।
मनवांछित फल पावत, मनइच्छा फल पावत, सेवत नर नारी ।।
ॐ जय अम्बे गौरी ।

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।
श्री मालकेतु में राजत, धोळा गिरी पर राजत, कोटि रतन ज्योति ।।
ॐ जय अम्बे गौरी ।

श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावै, मैया प्रेम सहित गावें ।
कहत शिवानन्द स्वामी, रटत हरिहर स्वामी, मनवांछित फल पावै ।।

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत , मैया जी को सदा मनावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ।।
ॐ जय अम्बे गौरी ।

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