दुर्गा अष्टमी पूजा विधि | Durga Ashtami Puja Vidhi PDF in Hindi

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दुर्गा अष्टमी पूजा विधि | Durga Ashtami Puja Vidhi Hindi PDF Summary

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Durga Ashtami is very significant for those who are doing any specific Sadhna and Siddhi. They can be reached the ultimate goal of the spiritual world by doing the perfect puja on the occasion of Durga Ashtami during Navratri. If you also want to do Durga Ashtami Puja at your home, you can follow this Puja Vidhi.

दुर्गा अष्टमी पूजन की विधि PDF | Durga Ashtami Puja Vidhi PDF

  • दुर्गा अष्टमी के दिन सुबह उठें, गंगाजल डालकर स्नानादि करें.
  • लकड़ी के पाठ लें और उस पर लाल वस्त्र बिछाएं.
  • फिर मां दुर्गा के मंत्र का जाप करते हुए उनकी प्रतिमा या फोटो स्थापित करें.
  • लाल या ऊड़हल के फूल, सिंदूर, अक्षत, नैवेद्य, सिंदूर, फल, मिष्ठान आदि से मां दुर्गा के सभी स्वरूपों की पूजा करें.
  • फिर धूप-दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और आरती भी करना न भूलें.
  • इसके बाद हाथ जोड़ें और उनके समक्ष अपनी इच्छाएं रखें.
  • ऐसा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.

नवरात्री अष्टमी व्रत कथा PDF | Durga Ashtami Vrat Katha PDF

सदियों पहले पृथ्वी पर असुर बहुत शक्तिशाली हो गए थे और वे स्वर्ग पर चढ़ाई करने लगे. उन्होंने कई देवताओं को मार डाला और स्वर्ग में तबाही मचा दी. इन सबमें सबसे शक्तिशाली असुर महिषासुर था. तब उसका अंत करने के लिए भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा ने शक्ति स्वरूप देवी दुर्गा को बनाया. हर देवता ने देवी दुर्गा को विशेष हथियार प्रदान किए. इसके बाद आदिशक्ति दुर्गा ने पृथ्वी पर आकर असुरों का वध किया. मां दुर्गा ने महिषासुर की सेना के साथ युद्ध किया और अंत में उसे मार दिया. उस दिन से दुर्गा अष्टमी का पर्व प्रारम्भ हुआ.

मां दुर्गा के विशेष मंत्र

सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते॥

ॐ क्लींग ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती ही सा,

बलादाकृष्य मोहय महामाया प्रयच्छति

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।

सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्ति भूते सनातनि।

गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥

शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।

घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च॥

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।

रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते।

भयेभ्याहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥

जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥

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दुर्गा अष्टमी पूजा विधि | Durga Ashtami Puja Vidhi pdf

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