देवनागरी लिपि की विशेषताएँ PDF

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देवनागरी लिपि की विशेषताएँ PDF Summary

नमस्कार पाठकों, इस लेख माध्यम से आप देवनागरी लिपि की विशेषताएँ PDF के रूप में प्राप्त करके पढ़ सकते हैं। देवनागरी लिपि के उद्भव के संदर्भ में विद्वानो के भिन्न – भिन्न मत हैं। कहा जाता है कि देवनागरी लिपि प्राचीन ब्राह्मी लिपि से विकसित हुयी है । अठारहवीं सदी में भी देवनागरी लिपि का स्वरूप आज के जैसा ही था।
कुछ भाषाविदों का कहना है कि देवनागरी लिपि का प्रयोग अधिकांशतः गुजरात के नगरों में किया जाता था इसलिए इसका नाम देवनागरी पढ़ा तथा वहीं दूसरी ओर कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह लिपि मुख्यतः नागर ब्राह्माण्डों प्रयुक्त की जाती थी अतः यही कारण है कि इसका नाम देवनागरी लिपि है ।

देवनागरी लिपि की विशेषताएँ PDF / Devnagri Lipi Ki Visheshtayen PDF

  • लिपि चिह्नों के नाम ध्वनि के अनुसार-

इस लिपि में चिह्नों के द्योतक उसके ध्वनि के अनुसार ही होते हैं और इनका नाम भी उसी के अनुसार होता है जैसे- अ, आ, ओ, औ, क, ख आदि। किंतु रोमन लिपि चिह्न नाम में आई किसी भी ध्वनि का कार्य करती है, जैसे- भ्(अ) ब्(क) ल्(य) आदि। इसका एक कारण यह हो सकता है कि रोमन लिपि वर्णात्मक है और देवनागरी ध्वन्यात्मक।

  • लिपि चिह्नों की अधिकता –

विश्व के किसी भी लिपि में इतने लिपि प्रतीक नहीं हैं। अंग्रेजी में ध्वनियाँ 40 के ऊपर है किंतु केवल 26 लिपि-चिह्नों से काम होता है। ‘उर्दू में भी ख, घ, छ, ठ, ढ, ढ़, थ, ध, फ, भ आदि के लिए लिपि चिह्न नहीं है। इनको व्यक्त करने के लिए उर्दू में ‘हे’ से काम चलाते हैं’ इस दृष्टि से ब्राह्मी से उत्पन्न होने वाली अन्य कई भारतीय भाषाओं में लिपियों की संख्याओं की कमी नहीं है। निष्कर्षत: लिपि चिह्नों की पर्याप्तता की दृष्टि से देवनागरी, रोमन और उर्दू से अधिक सम्पन्न हैं।

  • स्वरों के लिए स्वतंत्र चिह्न –

देवनागरी में ह्स्व और दीर्घ स्वरों के लिए अलग-अलग चिह्न उपलब्ध हैं और रोमन में एक ही (।) अक्षर से ‘अ’ और ‘आ’ दो स्वरों को दिखाया जाता है। देवनागरी के स्वरों में अंतर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

  • व्यंजनों की आक्षरिकता –

इस लिपि के हर व्यंजन के साथ-साथ एक स्वर ‘अ’ का योग रहता है, जैसे- च्+अ= च, इस तरह किसी भी लिपि के अक्षर को तोड़ना आक्षरिकता कहलाता है। इस लिपि का यह एक अवगुण भी है किंतु स्थान कम घेरने की दृष्टि से यह विशेषता भी है, जैसे- देवनागरी लिपि में ‘कमल’ तीन वर्णों के संयोग से लिखा जाता है, जबकि रोमन में छ: वर्णों का प्रयोग किया जाता है!

  • सुपाठन एवं लेखन की दृष्टि-

किसी भी लिपि के लिए अत्यन्त आवश्यक गुण होता है कि उसे आसानी से पढ़ा और लिखा जा सके इस दृष्टि से देवनागरी लिपि अधिक वैज्ञानिक है। उर्दू की तरह नहीं, जिसमें जूता को जोता, जौता आदि कई रूपों में पढ़ने की गलती अक्सर लोग करते हैं।
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