बुध प्रदोष व्रत कथा व पूजा विधि | Budh Pradosh Vrat Katha PDF in Hindi

बुध प्रदोष व्रत कथा व पूजा विधि | Budh Pradosh Vrat Katha Hindi PDF Download

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बुध प्रदोष व्रत कथा व पूजा विधि | Budh Pradosh Vrat Katha Hindi PDF Summary

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप बुध प्रदोष व्रत कथा व पूजा विधि PDF प्राप्त कर सकते हैं। बुध प्रदोष व्रत बुद्ध ग्रह को समर्पित होता है। बुध प्रदोष व्रत से मनुष्य को विभिन्न प्रकार की समस्याओं से मुक्ति मिलती है। भिन्न-भिन्न वार (दिनों) के अनुसार जो प्रदोष व्रत किया जाता है, वैसे ही उसका फल प्राप्त होता है।

सूत जी के कथनानुसार त्रयोदशी का व्रत करने वाले को सौ गौ-दान करने का फल प्राप्त होता है। यहाँ बुध त्रयोदशी प्रदोष व्रत की एक प्रचलित लोक कथा का वर्णन किया गया है जिसके पाठ से अथवा श्रवण करने से आप बुद्ध ग्रह के कारण उत्पन्न होने वाली विभिन्न प्रकार की समस्याओं से सरलता से मुक्त हो सकते हैं।

बुध प्रदोष व्रत कथा / Buddh Pradosh Vrat Katha PDF

सूत जी बोले- अब मैं आप लोगों को बुधवार त्रयोदशी व्रत की कथा तथा विधि सुनाता हूँ। इस व्रत के दिन केवल एक ही समय भोजन करें। हरे वस्त्र पहनें और हरी वस्तुओं का सेवन करें। प्रात: काल उठकर नित्य क्रम से निवृत हो कर शंकर जी का पूजन धूप-दीप,बेल पत्र से करें। प्राचीन काल की कथा है, एक पुरुष का नया-नया विवाह हुआ था। वह गौने के बाद दूसरी बार पत्नी को लिवाने के लिये अपनी ससुराल पहुँचा और उसने सास से कहा कि बुधवार के दिन ही पत्नी को लेकर अपने नगर जायेगा।

उस पुरुष के सास-ससुर ने, साले-सालियों ने उसको समझाया कि बुधवार को पत्नी को विदा कराकर ले जाना शुभ नहीं है, लेकिन वह पुरुष नहीं माना। विवश होकर सास-ससुर को अपने जमाता और पुत्री को भारी मन से विदा करना पड़ा । पति-पत्नी बैलगाड़ी में चले जा रहे थे। एक नगर से बाहर निकलते ही पत्नी को प्यास लगी। पति लोटा लेकर पत्नी के लिये पानी लेने गया। जब वह पानी लेकर लौटा तो उसने देखा कि उसकी पत्नी किसी पराये पुरुष के लाये लोटे से पानी पीकर , हँस-हँसकर बात कर रही है।

वह पराया पुरुष बिल्कुल इसी पुरुष के शक्ल-सूरत जैसा हीं था। यह देखकर वह पुरुष दूसरे अन्य पुरुष से क्रोध में आग-बबूला होकर लड़ाई करने लगा। धीरे-धीरे वहाँ काफी भीड़ इकट्ठा हो गयी । इतने में एक सिपाही भी आ गया। सिपाही ने स्त्री से पूछा कि सच-सच बता तेरा पति इन दोनों में से कौन है ? लेकिन वह स्त्री चुप रही क्योंकि दोनों पुरुष हमशक्ल थे । बीच राह में पत्नी को इस तरह लुटा देखकर वह पुरुष मन ही मन शंकर भगवान की प्रार्थना करने लगा कि हे भगवान मुझे और मेरी पत्नी को इस मुसीबत से बचा लो, मैंने बुधवार के दिन अपनी पत्नी को विदा कराकर जो अपराध किया है उसके लिये मुझे क्षमा करो।

भविष्य में मुझसे ऐसी गलती नहीं होगी। श्री शंकर भगवान उस पुरुष की प्रार्थना से द्रवित हो गये और उसी क्षण वह अन्य पुरुष कही अंतर्ध्यान हो गया। वह पुरुष अपनी पत्नी के साथ सकुशल अपने नगर को पहुँच गया। इसके बाद से दोनों पति-पत्नी नियमपूर्वक बुधवार प्रदोष व्रत करने लगे। बोलो उमापति शंकर भगवान की जय ।

बुध प्रदोष व्रत पूजन सामग्री / Budh Pradosh Vrat Pooja Samagri

क्रमांक सामग्री
1. धूप,
2. दीप,
3. घी,
4. सफेद पुष्प,
5. सफेद फूलों की माला,
6. आंकड़े का फूल,
7. श्वेत मिठाइयां,
8. श्वेत चंदन,
9. श्वेत वस्त्र,
10. जल से भरा हुआ कलश,
11. कपूर,
12. आरती के लिये थाली,
13. बेल-पत्र,
14. धतुरा,
15. भांग,
16. हवन सामग्री,
17. आम की लकड़ी।

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