बुद्ध वंदना | Buddha Vandana PDF in Hindi

बुद्ध वंदना | Buddha Vandana Hindi PDF Download

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बुद्ध वंदना | Buddha Vandana Hindi PDF Summary

नमस्कार मित्रों, इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको बुद्ध वंदना PDF / Buddha Vandana PDF Hindi के लिए डाउनलोड लिंक दे रहे हैं। भगवान बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में लुंबिनी, शाक्य गणराज्य (कपिलवस्तु) नेपाल में हुआ था। उनका असली नाम सिद्धार्थ गौतम है। महात्मा बुद्ध ने ज्ञान और धर्म को नई दिशा दी। बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक भी हैं और बौद्धों द्वारा पूजनीय हैं। इस पोस्ट से आप बड़ी आसानी से सिर्फ एक क्लिक में बुद्ध वंदना त्रिशरण पंचशील PDF डाउनलोड कर सकते हैं।

बुद्ध को कई नामों से भी जाना जाता है जैसे महात्मा बुद्ध, भगवान बुद्ध, सिद्धार्थ, शाक्यमुनि, आदि। वे एक महान आत्मा हैं जिन्होंने लोगों को भिक्षावृत्ति, ध्यान और तपस्या के बारे में सिखाया। 80 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने धर्म का प्रचार संस्कृत के स्थान पर उस समय की साधारण भाषा “पाली” में किया। 483 ईसा पूर्व में महात्मा बुद्ध की मृत्यु हो गई।

बुद्ध वंदना PDF | Buddha Vandana PDF Hindi

बुद्ध वन्दना :

नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स ।
नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स ।
नमों तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स ।

त्रिशरण :

बुद्धं सरणं गच्छामि ।
धम्म सरणं गच्छामि ।
संघ सरणं गच्छामि ।

दुतियम्पि बुद्धं सरणं गच्छामि ।
दुतियम्पि धम्म सरणं गच्छामि ।
दुतियम्पी संघ सरणं गच्छामि ।
ततियम्पि बुद्धं सरणं गच्छामि ।
ततियम्पि धम्म सरणं गच्छामि ।
ततियम्पी संघ सरणं गच्छामि ।

पंचशील :

पाणतिपाता वेरमणी सिक्खापदं समादियामि ।
अदिन्नादाना वेरमणी सिक्खापदं समादियामि ।
कामेसु मिच्छाचारा वेरमणी सिक्खापदं समादियामि ।
मुसावादा वेरमणी सिक्खापदं समादियामि ।
सुरा-मेरय-मज्ज-पमादट्ठानावेरमणी सिक्खापदं समादियामि ।
भवतु सर्व मंगलं

बुद्ध वंदना त्रिशरण पंचशील PDF

बुद्ध वन्दना :

उन भगवन अर्हत सम्यक सम्बुद्ध को नमस्कार ।
उन भगवन अर्हत सम्यक सम्बुद्ध को नमस्कार ।
ऊन भगवन अर्हत सम्यक सम्बुद्ध को नमस्कार ।

त्रिशरण :

मैं बुद्ध की शरण में जाता हूं ।
मैं धम्म की शरण में जाता हूँ ।
में संघ की शरण में जाता हूँ ।
मैं दूसरी बार भी बुद्ध की शरण में जाता हूँ ।
मैं दूसरी बार भी धम्म की शरण में जाता हूँ ।
में दूसरी बार भी संघ की शरण में जाता हूँ ।
मैं तीसरी बार भी बुद्ध की शरण में जाता हूँ ।
मैं तीसरी बार भी धम्म की शरण में जाता हूँ ।
में तीसरी बार भी संघ की शरण में जाता हूँ ।

पंचशील :

अर्थ मैं अकारण प्राणी हिंसा से दूर रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ ।
मैं बिना दी गयी वस्तु को न लेने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ ।
मैं कामभावना से विरत रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ ।
में झूठ बोलने और चुगली करने से विरत रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ ।
मैं कच्ची-पक्की शराब,नशीली वस्तुओं के प्रयोग से विरत रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ ।
सबका मंगल हो

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बुद्ध वंदना | Buddha Vandana pdf

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