भीष्म पंचक व्रत विधि | Bhishma Panchak Vrat Vidhi PDF in Hindi

भीष्म पंचक व्रत विधि | Bhishma Panchak Vrat Vidhi Hindi PDF Download

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भीष्म पंचक व्रत विधि | Bhishma Panchak Vrat Vidhi Hindi PDF Summary

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप भीष्म पंचक व्रत विधि / Bhishma Panchak Vrat Vidhi PDF प्राप्त कर सकते हैं। हिन्दू धर्म ग्रंथों में कार्तिक माह में भीष्म पंचक व्रत का विशेष महत्व कहा गया है। यह व्रत कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी से आरंभ होता है तथा पूर्णिमा तक चलता है। कार्तिक स्नान करने वाले सभी लोग इस व्रत को करते हैं। भीष्म पंचक को ‘पंच भीखू’ के नाम से भी जाना जाता है। धर्म ग्रंथों में कार्तिक स्नान को बहुत महत्त्व दिया गया है।

अतः कार्तिक स्नान करने वाले सभी लोग इस व्रत को करते हैं। भीष्म पितामह ने इस व्रत को किया था इसलिए यह ‘भीष्म पंचक’ नाम से प्रसिद्ध हुआ। कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी से पूर्णिमा तक के अंतिम पांच दिन पुण्यमयी तिथियां मानी जाती हैं। इनका बड़ा विशेष प्रभाव माना गया है। अगर कोई कार्तिक मास के सभी दिन स्नान नहीं कर पाये तो उसे अंतिम पांच दिन सुबह सूर्योदय से पहले स्नान कर लेने से सम्पूर्ण कार्तिक मास के प्रातःस्नान के पुण्यों की प्राप्ति कही गयी है।

भीष्म पंचक पूजा विधि | Bhishma Panchak Puja Vidhi

  • पुत्र की कामना करते हुए भीष्म पंचक व्रत का पालन करता हुआ तर्पण और अर्घ्य देता है।
  • उसे एक वर्ष के अन्दर ही पुत्र की प्राप्ति होती है। इस व्रत के प्रभाव से महापातकों का नाश होता है।
  • अर्घ्य देने के बाद पंचगव्य, सुगन्धित चन्दन के जल, उत्तम गन्ध व कुंकुम द्वारा सभी पापों को हरने वाले श्री हरि की पूजा करें.
  • भगवान के समीप पाँच दिनों तक अखण्ड दीप जलाएं।
  • भगवान श्री हरि को उत्तम नैवेद्य अर्पित करें।
  • पूजा-अर्चना और ध्यान नमस्कार करें। उसके बाद “ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय” मन्त्र का 108 बार जाप करें।
  • प्रतिदिन सुबह तथा शाम दोनों समय सन्ध्यावन्दन करके ऊपर लिखे मन्त्र का 108 बार जाप कर भूमि पर सोएं।
  • व्रत करते हुए ब्रह्मचर्य का पालन करना अति उत्तम है।
  • शाकाहारी भोजन अथवा मुनियों से प्राप्त भोजन द्वारा निर्वाह करें और ज्यादा से ज्यादा समय विष्णु पूजन में व्यतीत करें।
  • विधवा स्त्रियों को मोक्ष की कामना से यह व्रत करना चाहिए।
  • पूर्णमासी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराएँ तथा बछड़े सहित गौ दान करें।
  • इस प्रकार पूर्ण विधि के साथ व्रत का समापन करें।
  • पांच दिनों का यह भीष्म पंचक व्रत-एकादशी से पूर्णिमा तक किया जाता है।
  • इस व्रत में अन्न का निषेध है अर्थात इन पांच दिनों में अन्न नहीं खाना चाहिए।

भीष्म पंचक पूजा मंत्र | Bhishma Panchak Puja Mantra

तर्पण मंत्र –

सत्यव्रताय शुचये गांगेयाय महात्मने।

भीष्मायेतद् ददाम्यर्घ्यमाजन्म ब्रह्मचारिणे ।।

अर्घ्य मंत्र –

वैयाघ्रपद गोत्राय सांकृत्यप्रवराय च ।

अपुत्राय ददाम्येतदुदकं भीष्मवर्मणे ।।

वसूनामवताराय शन्तनोरात्मजाय च ।

अर्घ्यं ददानि भीष्माय आजन्म ब्रह्मचारिणे ।।

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