भीमरूपी महारुद्र | Bhimrupi Maharudra PDF

भीमरूपी महारुद्र | Bhimrupi Maharudra PDF Download

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भीमरूपी महारुद्र | Bhimrupi Maharudra PDF Summary

नमस्कार पाठकों, इस लेख के माध्यम से आप भीमरूपी महारुद्र PDF / Bhimrupi Maharudra PDF प्राप्त कर सकते हैं। भीमरूपी महारुद्र स्तोत्र हनुमान जी को समर्पित एक दिव्य स्तोत्र है जिसके नियमित पाठ से व्यक्ति सरलता से हनुमान जी को प्रसन्न कर सकता है। हनुमान जी को भगवान श्री राम के परम भक्त के रूप में भी जाना जाता है।

अतः भीमरूपी महारुद्र PDF के पाठ से न केवल व्यक्ति हनुमान जी को प्रसन्न कर सकता है बल्कि भगवान श्री राम जी की असीम अनुकंपा की भी प्राप्ति होती है। भीमरूपी महारुद्र एक अत्यधिक प्रभावशाली स्तोत्र है जिसका पाठ करते समय आपको उच्चारण का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि आप इसका सम्पूर्ण फल प्राप्त कर सकें।

भीमरूपी महारुद्र PDF / Bhimrupi Maharudra Stotra Lyrics in Sanskrit PDF

भीमरूपी महारुद्रा वज्र हनुमान मारुती ।

वनारि अंजनीसूता रामदूता प्रभंजना ॥ १॥

महाबळी प्राणदाता सकळां उठवी बळें ।

सौख्यकारी  दुःखहारी धूर्त वैष्णव गायका ॥ २॥

दीनानाथा हरीरूपा सुंदरा जगदांतरा ।

पातालदेवताहंता भव्यसिंदूरलेपना ॥ ३॥

लोकनाथा जगन्नाथा प्राणनाथा पुरातना ।

पुण्यवंता पुण्यशीला पावना परितोषका ॥ ४॥

ध्वजांगें उचली बाहो आवेशें लोटला पुढें ।

काळाग्नि काळरुद्राग्नि देखतां कांपती भयें ॥ ५॥

ब्रह्मांडें माइलीं नेणों आंवळे दंतपंगती ।

नेत्राग्नि चालिल्या ज्वाळा भ्रकुटी तठिल्या बळें ॥ ६॥

पुच्छ तें मुरडिलें माथां किरीटी कुंडलें बरीं ।

सुवर्णकटिकांसोटी घंटा किंकिणि नागरा ॥ ७॥

ठकारे पर्वताइसा नेटका सडपातळू ।

चपळांग पाहतां मोठें महाविद्युल्लतेपरी ॥ ८॥

कोटिच्या कोटि उड्डणें झेपावे उत्तरेकडे ।

मंदाद्रीसारिखा द्रोणू क्रोधें उत्पाटिला बळें ॥ ९॥

आणिला मागुती नेला आला गेला मनोगती ।

मनासी टाकिलें मागें गतीसी तूळणा नसे ॥ १०॥

अणूपासोनि ब्रह्मांडायेवढा होत जातसे ।

तयासी तुळणा कोठें मेरुमांदार धाकुटें ॥ ११॥

ब्रह्मांडाभोंवते वेढे वज्रपुच्छें करूं शके ।

तयासी तुळणा कैंची ब्रह्मांडीं पाहतां नसे ॥ १२॥

आरक्त देखिलें डोळां ग्रासिलें सूर्यमंडळा ।

वाढतां वाढतां वाढे भेदिलें शून्यमंडळा ॥ १३॥

धनधान्य पशुवृद्धि पुत्रपौत्र समग्रही ।

पावती रूपविद्यादि स्तोत्रपाठें करूनियां ॥ १४॥

भूतप्रेतसमंधादि रोगव्याधि समस्तही ।

नासती तूटती चिंता आनंदे भीमदर्शनें ॥ १५॥

हे धरा पंधराश्लोकी लाभली शोभली भली ।

दृढदेहो निःसंदेहो संख्या चंद्रकलागुणें ॥ १६॥

रामदासीं अग्रगण्यू कपिकुळासि मंडणू ।

रामरूपी अन्तरात्मा दर्शने दोष नासती ॥ १७॥

॥ इति श्री रामदासकृतं संकटनिरसनं नाम श्री मारुतिस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

श्री हनुमानजी आरती ॥ Shri Hanuman Ji Ki Aarti Lyrics

आरती कीजै हनुमान लला की।दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर कांपे।रोग दोष जाके निकट न झांके॥

अंजनि पुत्र महा बलदाई।सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥

दे बीरा रघुनाथ पठाए।लंका जारि सिया सुधि लाए॥

लंका सो कोट समुद्र-सी खाई।जात पवनसुत बार न लाई॥

लंका जारि असुर संहारे।सियारामजी के काज सवारे॥

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।आनि संजीवन प्राण उबारे॥

पैठि पाताल तोरि जम-कारे।अहिरावण की भुजा उखारे॥

बाएं भुजा असुरदल मारे।दाहिने भुजा संतजन तारे॥

सुर नर मुनि आरती उतारें।जय जय जय हनुमान उचारें॥

कंचन थार कपूर लौ छाई।आरती करत अंजना माई॥

जो हनुमानजी की आरती गावे।बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥

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